यदि आप हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) की तैयारी कर रहे हैं, तो “Haryana GK: Agriculture and Animal Husbandry of Haryana Notes PDF Download हरियाणा का कृषि एवं पशुपालन” एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। हरियाणा की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर आधारित है, जहां गेहूं, धान जैसी प्रमुख फसलें तथा डेयरी और पशुधन पालन का बड़ा योगदान है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हरियाणा के कृषि एवं पशुपालन से संबंधित सरल और विस्तृत नोट्स प्रदान करेंगे, जिससे आपकी परीक्षा की तैयारी मजबूत होगी। साथ ही, आप यहां से इन नोट्स का PDF डाउनलोड करके त्वरित पुनरावृत्ति भी कर सकते हैं।
❖ हरियाणा राज्य एक कृषि प्रधान राज्य है और राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है।
❖ राज्य की लगभग 70% जनसंख्या की जीविका का आधार कृषि है।
❖ हरियाणा प्रदेश केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में योगदान देने वाला दूसरा सबसे बड़ा राज्य है।
❖ हरियाणा में कुल कृषि योग्य भूमि 3.8 मिलियन हेक्टेयर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 86% है।
❖ राज्य के कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 3.62 मिलियन हेक्टेयर (96.2%) भूमि पर कृषि की जाती है।
❖ राज्य की तीन-चौथाई से अधिक जनसंख्या गांवों में निवास करती है और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर करती है।
❖ राज्य का खाद्यान्न उत्पादन वर्ष 1966-67 में 25.92 लाख टन था, जो 2022-23 में बढ़कर 184.32 लाख टन हो गया था।
❖ राज्य में पहली कृषि गणना वर्ष 1970-71 में हुई थी। राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 1966-67 में शुरू की गई हरित क्रांति के कारण हरियाणा प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन विशेषकर गेहूं उत्पादन में अत्यधिक सफलता प्राप्त हुई।
❖ राज्य में कृषि विज्ञान केंद्रों की कुल संख्या 18 है।
❖ वर्ष 1976 में राज्य का पहला कृषि विज्ञान केंद्र NDRI करनाल में शुरू किया गया था।
❖ वर्ष 2022-23 में गन्ना और तिलहन का उत्पादन क्रमशः 89.14 लाख टन तथा 14.73 लाख टन था। वहीं कपास का उत्पादन 10.00 लाख गांठ हुआ।
❖ आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार वर्ष 2022-23 के दौरान राज्य में चावल और गेहूं की औसत उपज क्रमशः 3564.4 व 4655.48 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी।।
❖ वर्ष 2023-24 में चावल और गेहूं की औसत अनुमानित उपज क्रमशः 4000 व 4950 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है।
❖ हरियाणा में 1966-67 में सकल बोया गया क्षेत्र 45.99 लाख हेक्टेयर था। जबकि वर्ष 2022-23 के दौरान राज्य में सकल बोया गया अनुमानित क्षेत्र 65.80 लाख हेक्टेयर है।
❖ आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार वर्ष 2021-22 में राज्य में चावल तथा गेहूं फसलों के अधीन क्षेत्र की कुल बोए गए क्षेत्र में प्रतिशतता 61.4% थी। वर्ष 2022-23 में चावल और गेहूं के अधीन क्षेत्र क्रमशः 16.61 लाख हेक्टेयर और 23.77 लाख हेक्टेयर था।
❖ जनसंख्या में वृद्धि के कारण भूमि का उपयोग अन्य कार्यों के लिए बढ़ा है, जिसका प्रभाव कृषि भूमि पर पड़ा है।
राज्य के कृषि जलवायवीय क्षेत्र
❖ हरियाणा की जलवायु शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क है तथा वहाँ औसत वार्षिक वर्षा 45.5 सेमी होती है।
❖ राज्य में कुल वर्षा का लगभग 70% वर्षा जुलाई से सितंबर के मध्य होती है। इसके अतिरिक्त शेष वर्षा दिसंबर से फरवरी के मध्य होती है।
❖ हरियाणा को दो कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है—
(i) उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र—मुख्यतः चावल, गेहूं, सब्जियों आदि हेतु उपयुक्त। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का मुख्यालय करनाल में स्थित है।
(ii) दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र—उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद, उपोष्णकटिबंधीय फलों, सब्जियों, जड़ी-बूटियों एवं औषधीय पौधों के उत्पादन हेतु उपयुक्त। दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र का मुख्यालय बावल (रेवाड़ी) में स्थित है।
❖ हरियाणा राज्य को तीन कृषि जोन में बाँटा गया है—
(i) कृषि जोन-1—इसके अंतर्गत राज्य के 8 जिले—यमुनानगर, फरीदाबाद, पलवल, पंचकूला, कैथल, अंबाला, कुरुक्षेत्र तथा रोहतक आते हैं।
(ii) कृषि जोन-2—इसके अंतर्गत राज्य के 7 जिले—जींद, फतेहाबाद, हिसार, सिरसा, पलवल, फरीदाबाद तथा रोहतक आते हैं।
(iii) कृषि जोन-3—इसके अंतर्गत राज्य के 7 जिले—गुरुग्राम, मेवात, भिवानी, चरखी-दादरी, झज्जर, महेंद्रगढ़ तथा रेवाड़ी आते हैं।
राज्य की प्रमुख फसलें
❖ राज्य में मुख्य रूप से दो प्रकार की फसलें पैदा की जाती हैं—रबी और खरीफ।
(i) रबी फसलें
❖ इन फसलों को स्थानीय भाषा में आमवाड़ी फसल भी कहा जाता है।
❖ इन फसलों को अक्टूबर-नवंबर महीने में बोया जाता है तथा अप्रैल-मई में काट लिया जाता है।
इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की फसलों को बोया जाता है, जो निम्न हैं—
गेहूँ
❖ हरियाणा में देश के कुल गेहूं उत्पादन का 12% गेहूं पैदा होता है। इसका उत्तर प्रदेश व पंजाब के बाद तीसरा स्थान है। यह अपनी खपत से अधिक गेहूं का उत्पादन करता है। इसलिए इसे देश की गेहूं की टोकरी भी कहा जाता है।
❖ राज्य में गेहूं उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हिसार, सिरसा (सर्वाधिक), भिवानी व जींद हैं।
❖ सिरसा जिले में राज्य के कुल गेहूं उत्पादन का 10.6% होता है, जबकि राज्य में गेहूं का सबसे कम उत्पादन पंचकूला जिले में (0.4%) होता है।
❖ राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार वर्ष 2022-23 में गेहूं का उत्पादन 110.64 लाख टन था। वहीं वर्ष 2022-23 में गेहूं के अधीन क्षेत्र 23.77 लाख हेक्टेयर था।
❖ हरियाणा में प्रथम अनाज बैंक पिपली में स्थापित किया गया है।
❖ राज्य के कुरुक्षेत्र जिले में एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अनाज मंडी स्थित है।
कपास
❖ हरियाणा का कपास उत्पादन में देश में चौथा स्थान है। राज्य में कपास उत्पादक जिले—हिसार, सिरसा, भिवानी, जींद, रोहतक आदि हैं।
❖ हरियाणा कपास उत्पादन में देश का प्रमुख राज्य है। हरियाणा का सर्वाधिक कपास उत्पादक जिला सिरसा है, जो राज्य के कुल कपास उत्पादन का 37.8% भाग उत्पादित करता है।
❖ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा के आँकड़े के अनुसार वर्ष 2022-23 में कपास का क्षेत्रफल 575 हजार हेक्टेयर था।
❖ राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार वर्ष 2022-23 में कपास का उत्पादन 10.00 लाख गांठ था।
❖ केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र (CCRC) हरियाणा के सिरसा जिले में स्थित है।
❖ कॉटन सिटी ऑफ हरियाणा पलवल को कहते हैं।
हरियाणा—जिलावार प्रमुख फसलें
| जिला | प्रमुख फसल उत्पादन |
|---|---|
| अंबाला | गेहूं, चावल, मक्का, गन्ना |
| यमुनानगर | गेहूं, गन्ना, चना, मक्का, चावल, सूरजमुखी |
| पंचकूला | चावल, गेहूं, चना |
| कैथल | गेहूं, चावल |
| कुरुक्षेत्र | गेहूं, बासमती चावल, गन्ना |
| करनाल | चावल, गन्ना, सूरजमुखी |
| रोहतक | ज्वार, बाजरा, गेहूं, गन्ना, कपास, चना |
| सोनीपत | गेहूं, चावल, गन्ना, ज्वार, बाजरा, दलहन, खुबानी, सूरजमुखी |
| गुरुग्राम | ज्वार, बाजरा, गेहूं, जौ, चना |
| झज्जर | गेहूं, चना, चावल |
| फरीदाबाद | गेहूं, बाजरा, सरसों |
| पलवल | गेहूं, चना, बाजरा |
| मेवात | गेहूं, बाजरा, सरसों |
| रेवाड़ी | गेहूं, चावल, चना |
| महेंद्रगढ़ | गेहूं, सरसों, चना, बाजरा |
| हिसार | गेहूं, चावल, कपास, चना, तिलहन, दलहन |
| भिवानी | गेहूं, चावल, कपास, चना, सरसों |
| फतेहाबाद | गेहूं, चना, चावल |
| जींद | चावल, गेहूं, बाजरा, तिलहन, कपास |
| चरखी-दादरी | गेहूं, चावल, कपास, चना, सरसों |
| सिरसा | गेहूं, चावल, चना, कपास, सरसों |
जौ
❖ जौ की फसल हिसार, सिरसा, रोहतक, सोनीपत, जींद, भिवानी, करनाल, महेंद्रगढ़, फरीदाबाद आदि क्षेत्रों में उगाई जाती है।
❖ राज्य का सर्वाधिक जौ उत्पादक जिला भिवानी है, जहाँ लगभग राज्य के कुल उत्पादन का 23.35% उत्पादित होता है।
चना
❖ चने की फसल भिवानी, हिसार, सिरसा, महेंद्रगढ़, रोहतक आदि क्षेत्रों में उगाई जाती है।
❖ राज्य का सर्वाधिक चना उत्पादक जिला भिवानी है, जहाँ राज्य के लगभग कुल चना उत्पादन का 54.2% उत्पादित होता है।
दलहन व तिलहन फसलें
❖ तिलहन व दलहनी फसलें भिवानी, हिसार, महेंद्रगढ़, रोहतक, रेवाड़ी, सिरसा, जींद, गुरुग्राम, सोनीपत आदि क्षेत्रों में उगाई जाती हैं।
❖ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा के आँकड़े के अनुसार वर्ष 2022–23 में तिलहन का उत्पादन 14.73 लाख टन था। राज्य में सरसों का सर्वाधिक उत्पादन महेंद्रगढ़ जिले में किया जाता है।
(ii) खरीफ फसलें
❖ इन फसलों को सावनी फसल भी कहा जाता है। इन फसलों को जुलाई के प्रारंभ में बोया जाता है तथा सितंबर में काट लिया जाता है।
मक्का
❖ इस फसल में जल की बहुत कम आवश्यकता होती है। इसकी खेती अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, रोहतक जिलों में पाई जाती है।
❖ राज्य का पंचकूला जिला शीर्ष मक्का उत्पादक जिला है, जहाँ राज्य के कुल मक्का उत्पादक क्षेत्र का 61.62% भाग तथा कुल मक्का उत्पादन का 56.69% उत्पादित होता है।
चावल
❖ राज्य गठन के समय से वर्तमान समय तक चावल के उत्पादन में 12 गुना वृद्धि हुई है। अब यह इस राज्य की लोकप्रिय खाद्य फसल है।
❖ राज्य में चावल उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं—करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, जींद, सोनीपत, हिसार।
❖ राज्य का करनाल जिला बासमती चावल के उत्पादन में विश्व प्रसिद्ध होने के कारण चावल का कटोरा नाम से जाना जाता है।
❖ करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र व जींद को संयुक्त रूप से धान का कटोरा कहा जाता है।
❖ राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2023–24 के अनुसार वर्ष 2022–23 में चावल का क्षेत्रफल 16.61 लाख हेक्टेयर था, वहीं चावल का उत्पादन 59.21 लाख टन था।
बाजरा
❖ इसकी बुवाई सिंचित क्षेत्रों के मध्य जुलाई में तथा गैर-सिंचित क्षेत्रों में प्रथम मानसूनी वर्षा के बाद की जाती है।
❖ इसकी खेती सिरसा, हिसार, फतेहाबाद एवं फरीदाबाद में होती है।
❖ राज्य में बाजरे का शीर्ष उत्पादक जिला महेंद्रगढ़ है। इस जिले में राज्य का 22.09% तथा भारत के कुल उत्पादन का 25.09% बाजरा उत्पादित किया जाता है।
वर्ष 2022–23 में राज्य में मुख्य फसलों का लक्षित क्षेत्र, उत्पादन और औसत उपज
| फसल | क्षेत्र (‘000 हेक्टेयर) | उत्पादन (‘000 टन) | औसत उपज (किग्रा प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|---|---|
| चावल | 1200 | 4800 | 4000 |
| ज्वार | 75 | 46 | 613 |
| मक्का | 40 | 112 | 2800 |
| बाजरा | 525 | 1050 | 2000 |
| खरीफ दालें | 100 | 100 | 1000 |
| कुल खरीफ खाद्यान्न | 1940 | 6108 | 3148 |
| गेहूं | 2500 | 12375 | 4950 |
| चना | 70 | 116 | 1657 |
| जौ | 20 | 68 | 3400 |
| रबी दालें | 20 | 24 | 1200 |
| कुल रबी खाद्यान्न | 2610 | 12583 | 4821 |
| कुल खाद्यान्न रबी एवं खरीफ | 4550 | 18691 | 4108 |
| व्यावसायिक फसलें | |||
| गन्ना | 120 | 10440 | 87000 |
| कपास (गांठ)* | 700 | 2200 | 535 |
| खरीफ तेल बीज | 25 | 225 | 900 |
| रबी तेल बीज | 650 | 1365 | 2100 |
| सूरजमुखी | 15 | 30 | 2000 |
* कपास का उत्पादन—गांठों में प्रत्येक 170 किग्रा।
स्रोत—कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा।
ज्वार
❖ ज्वार की फसल गर्म और शुष्क भागों में साधारण वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है।
❖ उत्पादन की दृष्टि से सिरसा, महेंद्रगढ़, भिवानी, जींद जिले प्रमुख हैं।
❖ राज्य का शीर्ष ज्वार उत्पादक जिला रोहतक है, जहाँ राज्य के कुल ज्वार क्षेत्र का लगभग 32.25% तथा कुल ज्वार उत्पादन का 29.63% उत्पादित होता है।
गन्ना
❖ राज्य में गन्ना उत्पादन के दृष्टि से यमुनानगर का जिले में प्रथम स्थान है। यहाँ राज्य के कुल गन्ने का 27% गन्ना उत्पादित होता है। अन्य जिलों में रोहतक, करनाल, कुरुक्षेत्र, सोनीपत, जींद और अंबाला का स्थान आता है।
❖ हरियाणा गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल में स्थित है।
बागवानी कृषि
❖ बागवानी विभाग द्वारा फलों के उत्पादन में तीव्र वृद्धि के लिए क्लस्टर पद्धति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
❖ बटन मशरूम के उत्पादन में हरियाणा का भारत में प्रथम स्थान है। आम की खेती हरियाणा में सर्वाधिक क्षेत्र में (फलों में) की जाती है।
❖ राज्य में 4.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बागवानी फसलों के अधीन जो हरियाणा के सकल फसल क्षेत्र का 6.28% है।
❖ राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार राज्य में वर्ष 2022-23 में बागवानी फसलों का कुल उत्पादन 64.18 लाख मीट्रिक टन था।
❖ वर्ष 2022-23 में फलों की खेती का कुल क्षेत्रफल 69139.46 हेक्टेयर था जिसमें 10.10 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ था।
❖ वर्ष 2022-23 में सब्जी की खेती के अंतर्गत 53.45 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के साथ 343264.80 हेक्टेयर क्षेत्र था।
❖ वर्ष 2022-23 में मसाला फसलों के अंतर्गत 0.34 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के साथ कुल 6142.60 हेक्टेयर क्षेत्र था।
❖ वर्ष 2022-23 में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के अंतर्गत 2176 मीट्रिक टन उत्पादन के साथ कुल 169.1 हेक्टेयर क्षेत्र था।
❖ वर्ष 2022-23 में फूलों की खेती के अंतर्गत 0.22 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के साथ कुल 1757.40 हेक्टेयर क्षेत्र था।
❖ हरियाणा में सबसे ज्यादा फल व सब्जियों का केंद्र सिरसा जिला है।
❖ हरियाणा में सबसे कम फलों एवं सब्जियों का केंद्र महेंद्रगढ़ है।
❖ बागवानी कृषि के विकास के लिए राज्य सरकार ने कुछ नए कदम उठाए हैं, जो निम्न प्रकार हैं—
❖ फल उत्कृष्टता केंद्र—यह केंद्र मंगियाना (सिरसा) में लगभग 80 एकड़ भूमि पर विस्तृत है। यहाँ फल उत्पादन से संबंधित आधुनिक तकनीकों के प्रयोग के विषय में जानकारी दी जाती है। इस केंद्र में सिट्रस फलों—अनार, खजूर व जैतून उत्पादन की तकनीक एवं किस्मों को प्रदर्शित किया गया है।
❖ बागवानी जैव-प्रौद्योगिकी केंद्र—यह केंद्र शामगढ़ (करनाल) में स्थित है। इस केंद्र का शुभारंभ 6 अप्रैल, 2016 को किया गया था।
❖ मधुमक्खी उत्कृष्टता केंद्र—यह केंद्र रामनगर (कुरुक्षेत्र) में स्थित है। इस केंद्र में शहद उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु मधुमक्खी पालकों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
❖ उपोष्ण कटिबंधीय फल उत्कृष्टता केंद्र—यह केंद्र लाडवा (कुरुक्षेत्र) में 30 एकड़ भूमि पर विस्तृत है। यहाँ आम की 28 किस्में, अमरूद की 4 किस्में, आड़ू की 6 किस्में, नाशपाती की 7 किस्में, अनार की 4 किस्में व जैतून की 5 किस्मों के उत्पादन की तकनीकों को प्रदर्शित किया गया है।
❖ अमृत तकनीकी प्रदर्शन केंद्र—यह केंद्र भुना (फतेहाबाद) में स्थित है। यहाँ अमरूद उत्पादकों के लिए प्रत्येक प्रकार के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इस केंद्र में अमरूद की 18 प्रजातियों की उत्पादन तकनीक को प्रदर्शित किया गया है।
❖ फूल उत्कृष्टता केंद्र—यह झज्जर में स्थित है। यहाँ फूल उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु उत्पादकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
❖ महाराणा प्रताप उद्यान/बागवानी विश्वविद्यालय—बागवानी फसलों में अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा करनाल में बागवानी विश्वविद्यालय की स्थापना की है।
राज्य के प्रमुख फल एवं उत्पादक क्षेत्र
| फल | प्रमुख उत्पादक क्षेत्र |
|---|---|
| आम | अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पंचकूला, यमुनानगर |
| अमरूद | करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद, हिसार, गुरुग्राम |
| पपीता | यमुनानगर, करनाल, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, अंबाला |
| बेर | सोनीपत, गुरुग्राम, हिसार, फतेहाबाद, रोहतक |
| आँवला | सिरसा (सर्वाधिक), गुरुग्राम, हिसार, करनाल, फरीदाबाद, अंबाला, फतेहाबाद |
राज्य की प्रमुख सब्जियाँ एवं उत्पादक क्षेत्र
| सब्जी | प्रमुख उत्पादक क्षेत्र |
|---|---|
| आलू (राज्य की सर्वाधिक उत्पादित सब्जी) | कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला, करनाल |
| प्याज | गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत, पंचकूला |
| फूलगोभी | सोनीपत, पानीपत, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र |
| कुकुर्बिट्स | करनाल, सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम |
राज्य के प्रमुख मसाले एवं उत्पादक क्षेत्र
| मसाले | प्रमुख उत्पादक क्षेत्र |
|---|---|
| हल्दी | यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला |
| मिर्च | यमुनानगर, करनाल, हिसार, फतेहाबाद, जींद |
| लहसुन | करनाल, यमुनानगर, गुरुग्राम, सिरसा |
| धनिया | कुरुक्षेत्र, करनाल, गुरुग्राम, पंचकूला, अंबाला |
| मेथी | गुरुग्राम, हिसार, महेंद्रगढ़, जींद, कुरुक्षेत्र |
राज्य के प्रमुख फूल एवं उत्पादक क्षेत्र
| फूल | प्रमुख उत्पादक क्षेत्र |
|---|---|
| गुलाब | पानीपत, सोनीपत, गुरुग्राम, कैथल |
| गेंदा | गुरुग्राम, सोनीपत, जींद, झज्जर, फरीदाबाद |
| रजनीगंधा | फरीदाबाद |
| ग्लैडिओलस | फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल, पंचकूला |
राज्य में स्थित प्रमुख फूड पार्क
(i) राई, सोनीपत में
(ii) साहा, अंबाला में
(iii) डबवाली, सिरसा में
(iv) नरवाना, जींद में
(v) बड़ौदी, सोनीपत में
हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड
❖ हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की स्थापना मार्केट कमेटियों की देख-रेख के उद्देश्य से 1 अगस्त, 1969 को की गई थी।
❖ इस विपणन बोर्ड का मुख्यालय पंचकूला में स्थित है।
❖ इस बोर्ड की स्थापना से अब तक अनाज की खरीद के लिए 114 मुख्य यार्ड, 172 सब यार्ड तथा 204 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं।
राज्य सरकार द्वारा नई पहल
❖ हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा 150 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 78.33 एकड़ भूमि पर पिंजौर में सेब, फल तथा सब्जी मंडी का निर्माण किया जा रहा है।
❖ गुरुग्राम में फूल मंडी की स्थापना।
❖ सोरस (सोनीपत) में सूखे मेवों तथा मसाला मंडी की स्थापना।
❖ भारतीय अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी गन्नौर जिला सोनीपत का विकास।
ई नाम
❖ राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम की परिकल्पना एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल के रूप में की गई, जो कृषि वस्तुओं के लिए एक वैश्विक बाजार मंच बनाने के लिए मौजूदा ए.पी.एम.सी. और अन्य मार्केट यार्ड को जोड़ना चाहता है।
❖ हरियाणा, देश के उन 18 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल है जिन्होंने ई-नाम को लागू किया है।
❖ हरियाणा राज्य की 81 मंडियों को ई-नाम पोर्टल से वर्ष 2020 में जोड़ दिया चुका है तथा 27 मंडियों को ई-नाम पोर्टल से दिसंबर, 2022 को जोड़ दिया गया।
अटल किसान-मजदूर कैंटीन
❖ हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा किसानों तथा मजदूरों को 10 रुपये में रियायती दर पर दोपहर का भोजन उपलब्ध कराने के लिए 25 मंडियों में अटल किसान-मजदूर कैंटीन स्थापित किए गए हैं। अन्य 15 मंडियों में भी इसी प्रकार की कैंटीन बनाने की प्रक्रिया जारी है।
कृषि क्षेत्र में विभिन्न योजनाएँ
हरियाणा फसल विविधीकरण योजना
❖ हरियाणा सरकार ने खरीफ 2020 के दौरान धान की फसल (पानी की खपत वाली फसल) में मक्का, कपास, दालें, बाजरा, सब्जियों और फलों जैसे वैकल्पिक कम पानी की खपत वाली फसलों द्वारा विविधता लाने के लिए ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ की एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की थी।
❖ इस योजना का संचालन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा द्वारा किया जाएगा।
❖ ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ के तहत उन किसानों को ₹ 7000 प्रति एकड़ की दर से सहायता प्रदान की जाएगी जिन्होंने अपनी धान की फसल को वैकल्पिक फसलों के साथ बदल दिया है।
❖ खरीफ-2021 में इस योजना को अतिरिक्त वैकल्पिक फसलों जैसे—खरीफ तिलहन (तिल, अरंडी, मूंगफली), खरीफ ज्वार, खरीफ दलहन (मोंठ, उर्द, ग्वार, सायाबीन), चारा फसलों के साथ और मजबूत किया गया है।
❖ वैकल्पिक फसलों के दायरे में कृषि वानिकी (लीग्यूम्स और पोपलर) को शामिल करके इस योजना को खरीफ 2022 में और मजबूत किया गया।
दलहन और तिलहन फसलों के संवर्धन के लिए योजना
❖ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा ने राज्य में बाजरा के स्थान पर दलहन (मूंग, अरहर और उड़द) और तिलहन (मूंगफली, तिल और अरंडी) को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना शुरू की है।
❖ खरीफ-2022 के दौरान, बाजरा विविधीकरण, दलहन और तिलहन को बढ़ावा देने की योजना के तहत ₹ 4000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी गई।
❖ यह योजना राज्य के 7 जिलों चरखी-दादरी, हिसार, भिवानी, मेवात, रेवाड़ी, झज्जर और महेंद्रगढ़ में लागू की गई है।
प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना
❖ केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर, 2019 को झारखंड के रांची से की।
❖ इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के पश्चात किसानों को न्यूनतम ₹ 3,000 पेंशन देने का प्रावधान है, जो हरियाणा सहित पूरे देश में लागू है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना
❖ केंद्र प्रायोजित योजना है, जो हरियाणा प्रदेश सहित पूरे देश में लागू है। इस योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई। इस योजना के अन्तर्गत किसानों को प्रतिवर्ष ₹ 6,000 (तीन किस्तों में) की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
❖ हरियाणा सरकार द्वारा 23 फरवरी, 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का शुभारंभ किया गया।
❖ इस योजना में किसानों को ऋण के माध्यम से प्रीमियम दरों का भुगतान किया जाता है।
❖ योजना के अन्तर्गत खरीफ सीजन में धान, मक्का, कपास, बाजरा और मूंग को कवर किया जा रहा है और रबी सीजन में गेहूं, चना, जौ, सरसों और सूरजमुखी को कवर किया जा रहा है।
❖ राज्य सरकार ने योजना को खरीफ-2020 से रबी 2022-23 तक लागू करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत किसान का प्रीमियम रबी की फसल के लिए 1.50 प्रतिशत, खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत और व्यापारिक फसल के लिए 5 प्रतिशत होता है।
❖ योजना में खड़ी फसल में जलभराव (धान फसल को छोड़कर) ओलावृष्टि, सूखा, बाढ़, आसमानी बिजली आदि जोखिम को कवर किया गया है। इसके अतिरिक्त फसल कटाई के 14 दिनों के अन्दर चक्रवात, चक्रवाती बारिश व बेमौसमी वर्षा के परिणामस्वरूप कटी और फैली हुई खेत में पड़ी पकी फसल को हुए नुकसान को भी बीमा में शामिल किया गया है।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
❖ यह योजना वर्ष 2007-08 में राज्य में प्रारंभ की गई। इस योजना का उद्देश्य कृषि व कृषि संबंधित क्षेत्रों का समग्र विकास तथा कृषि और संबंधित क्षेत्रों में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
❖ वर्ष 2018 में इस योजना को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आर.के.वी.वाई.)—रफ्तार कृषि और संबद्ध क्षेत्र के कायाकल्प के लिए लाभकारी दृष्टिकोण के रूप में एक नया रूप दिया गया।
❖ आर.के.वी.वाई.—रफ्तार का उद्देश्य किसानों के प्रयासों को मजबूत करने, जोखिम कम करने और कृषि व्यापार उद्यमिता को लाभकारी आर्थिक गतिविधि बनाना है।
❖ हरियाणा सरकार ने वर्ष 2022-23 के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं उपयोजना के लिए ₹ 200 करोड़ सामान्य आर.के.वी.वाई. ₹ 30 करोड़ आर.के.वी.वाई.—एस.सी.एस.पी. के लिए प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री कृषक एवं खेतिहर जीवन सुरक्षा योजना
❖ यह योजना जनवरी 2014 में शुरू की गई। इस योजना के अन्तर्गत कृषि कार्य के दौरान दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसके आश्रित पत्नी या बच्चों को ₹ 5 लाख तथा शरीर के किसी अंग के नष्ट होने पर ₹ 37,500 से ₹ 2.50 लाख की आर्थिक सहायता दी जाती है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना
❖ राज्य में वर्ष 2007-08 में प्रारंभ की गई। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य व जिलों में स्थानीय तरीके से क्षेत्र विस्तार व उत्पादकता वृद्धि करके उत्पादन को बढ़ाना है।
रिवॉल्विंग कैश क्रेडिट स्कीम
❖ किसानों की खुशहाली के लिए रिवॉल्विंग कैश क्रेडिट स्कीम तथा कृषक उपहार योजना को शुरू की गई है।
❖ हरियाणा राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक भूमि खरीद के लिए ऋण सीमा ₹ 2 लाख से बढ़ाकर ₹ 10 लाख कर दी गई है। गैर-कृषि ऋणों की सीमा ₹ 10 लाख से बढ़ाकर ₹ 15 लाख कर दी गई है।
जननायक चौधरी देवी लाल पुरस्कार
❖ कृषि पैदावार के क्षेत्र में जिला स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले किसान को ₹ 25,000 और राज्य स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले किसान को एक लाख रुपये के जननायक चौधरी देवी लाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।
कृषि हेल्पलाइन
❖ राज्य सरकार ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में निःशुल्क कृषि हेल्पलाइन (टेली एग्रीकल्चर) सेवा शुरू की है।
भावान्तर भरपाई योजना
❖ हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गई भावान्तर भरपाई योजना 1 जनवरी, 2018 से प्रभावी हुई।
❖ इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में बागवानी उत्पादों की कम कीमत के जोखिम को कम करना तथा कृषि में विविधीकरण के लिए किसानों को प्रेरित करना है।
❖ इस योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार ने 21 बागवानी फसलों को शामिल किया है।
❖ इन फसलों का समर्थन मूल्य किसानों को प्रदान किया जाएगा।
फसल समूह विकास योजना
❖ हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण तथा विकास एवं पंचायत मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने 21 फरवरी, 2018 को ‘फसल समूह विकास योजना’ का शुभारंभ गुरुग्राम जिले के ऊंचागांव गांव से किया।
❖ इस योजना का उद्देश्य बिचौलियों की मध्यस्थता को समाप्त करने तथा किसानों की आय को दोगुना करना है।
❖ इस योजना के अन्तर्गत राज्य में 340 गांवों में 140 क्लस्टर स्थापित किए गए हैं।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना
❖ वर्ष 2009-10 में रबी फसल के दौरान राज्य में पहली बार मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू की गई।
❖ यह योजना राज्य के 12 जिलों में कार्यान्वित है।
❖ यह योजना पैदावार मानकों पर आधारित न होकर, मौसम आधारित मानदंडों (वर्षा, तापमान, शुष्कता आदि) पर आधारित है। धान एवं गेहूं इसकी प्रमुख फसलें हैं।
कृषि निवेश में गुणवत्ता नियंत्रण योजना
❖ कृषि निवेश में गुणवत्ता नियंत्रण योजना की शुरुआत वर्ष 2006-07 में किसानों को उत्तम श्रेणी के खाद, बीज तथा कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए की गई थी।
❖ इस योजना का प्रमुख उद्देश्य उर्वरक/कीटनाशकों तथा बीजों में मिलावट पर नियंत्रण स्थापित करना था।
❖ इस योजना के अन्तर्गत रोहतक तथा पंचकूला में कीटनाशक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला स्थापित की गई।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण योजना
❖ किसानों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य दिलाना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है।
❖ इस योजना में निम्नलिखित घटक शामिल हैं—मूल्य समर्थन योजना, मूल्य कमी भुगतान योजना और निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट योजना का पायलट।
मेरी फसल मेरा ब्यौरा
❖ यह राज्य सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसमें किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसलों को बेचने, और कृषि एवं अन्य संबंधित विभागों के अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए स्वयं को पंजीकृत करते हैं। यह सभी किसानों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए एकमात्र ‘सिंगल विंडो मंच’ है।
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
❖ हरियाणा में कृषि विज्ञान केंद्रों की कुल संख्या 18 है।
❖ हरियाणा में बंजर भूमि कुल भूमि का 7% है।
❖ हरियाणा राज्य को गेहूं की टोकरी कहा जाता है।
❖ भारत स्टार केमिकल लिमिटेड यमुनानगर (1938) में स्थित है।
❖ कॉटन सिटी ऑफ हरियाणा पलवल जिले को कहते हैं।
❖ यमुनानगर जिले में हरियाणा का एक-तिहाई गन्ना उत्पादित होता है।
❖ हरियाणा में सबसे ज्यादा फल एवं सब्जियां सिरसा जिले में उत्पादित की जाती हैं।
❖ राज्य में सबसे कम फल एवं सब्जियां महेंद्रगढ़ में उत्पादित की जाती हैं।
❖ फूल उत्कृष्टता केंद्र झज्जर जिले के मुनीमपुर में स्थित है।
❖ भावान्तर भरपाई योजना लागू करने वाला हरियाणा भारत का पहला राज्य है।
❖ कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अनाज मंडी है।
❖ किसानों को ऋण माफ करने वाला हरियाणा भारत का पहला राज्य है।
❖ फसल बीमा योजना लागू करने वाला हरियाणा देश का प्रथम राज्य है।
❖ देश का पहला ‘जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र’, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में 139 एकड़ में स्थापित है। इसका नाम देवलाल उपाध्याय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग है।
प्राकृतिक खेती योजना
❖ हरियाणा सरकार ने वर्ष 2022-23 के बजट प्रावधान के साथ खेती की लागत को कम करके रासायनिक मुक्त कृषि को बढ़ावा देने और किसानों की आय को दोगुना करने एवं खेती को स्थायी आजीविका विकल्प बनाने के लिए जून 2022 में राज्य में प्राकृतिक खेती की योजना को शुरूआत की।
मेरा पानी, मेरी विरासत योजना (एम.पी.एम.वी.)
❖ राज्य सरकार ने खरीफ-2020 के दौरान धान की फसल (पानी की खपत वाली फसल) में मक्का, कपास, बाजरा, दालें, सब्जियों और फलों जैसे वैकल्पिक कम पानी की खपत वाली फसलों द्वारा विविधता लाने के लिए ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना की शुरुआत की।
❖ मेरा पानी, मेरी विरासत के तहत उन किसानों को ₹ 7000 प्रति एकड़ की दर से सहायता दी जाएगी जिन्होंने अपनी धान की फसल को वैकल्पिक फसलों के साथ बदल दिया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन
❖ हरियाणा सरकार द्वारा प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित लोगों को राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर मुआवजा प्रदान किया जाता है।
❖ फसलों को आंधी-तूफान, अग्नि, भारी वर्षा, कीट हमलों, ओलावृष्टि, आदि से होने वाले नुकसान के मुआवजे का दायरा भी बढ़ाया गया है।
❖ प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की फसल खराब होने पर मुआवजे की राशि 12000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 15000 रुपये प्रति एकड़ कर दी है।
कुछ प्रमुख संस्थान एवं उनके स्थापना वर्ष
| संस्थान | स्थापना वर्ष |
|---|---|
| हरियाणा गन्ना प्रजनन केंद्र, करनाल | 1932 |
| भारतीय गेहूं अनुसंधान संस्थान (DWR), करनाल | 1978 |
| केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) करनाल | 1969 |
| गेहूं शोध निदेशालय, करनाल | 1978 |
हरियाणा राज्य भंडारण निगम
❖ इस निगम की स्थापना 1 नवंबर 1967 को की गई थी। यह संसद के अधिनियम के तहत बनाया गया एक वैधानिक निकाय है।
❖ इस निगम के गठन करने का उद्देश्य किसानों, एजेंसियों, सार्वजनिक उद्यमों, व्यापारियों आदि को कृषि उपज और अधिसूचित वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए वैज्ञानिक भंडारण सुविधाएं प्रदान करना है और गोदामों में जमा माल के बदले क्रेडिट उपलब्ध कराना है।
❖ वर्तमान में 31 अक्टूबर, 2022 तक निगम राज्य में 113 गोदामों का संचालन कर रहा है जिसमें से 107 स्वामित्व वाले और 6 गोदाम प्रबंधन के आधार पर राज्य भर में 18.44 लाख मीट्रिक टन की कुल भंडारण क्षमता के साथ है, जिसमें 18 लाख मीट्रिक टन क्षमता के कवरड गोदाम और 0.44 लाख मीट्रिक टन क्षमता के ओपन प्लिंथ शामिल हैं।
हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन प्रबंध (हैफेड)
❖ हैफेड राज्य का सर्वोच्च शीर्ष सहकारी संघ है। यह 1 नवम्बर, 1966 को हरियाणा के एक अलग राज्य के गठन के साथ अस्तित्व में आया।
❖ हैफेड का मिशन और लक्ष्य व्यावसायिक और कुशल सहायता प्रदान करके राज्य के किसानों की आर्थिक हितों को बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाना है।
❖ संघ का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादन और सहवद्ध उत्पादों की खरीद, विपणन और प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था करना, कृषि आदानों की आपूर्ति जैसे—खाद, बीज व कृषि रसायनों की व्यवस्था करना तथा सम्बद्ध सहकारी समितियों के कामकाज को सुव्यवस्थित बनाना है।
मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन
❖ 19 फरवरी, 2015 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को सूरतगढ़, राजस्थान में पोषक तत्वों की कमी के समाधान के उद्देश्य से और मृदा परीक्षण आधारित पोषक प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
❖ यह योजना हरियाणा में अप्रैल 2015 से शुरू की गई थी।
पशुपालन
❖ हरियाणा की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि के बाद पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आय का दूसरा प्रमुख स्रोत है।
❖ देश में प्रत्येक 5 वर्ष पर पालतू पशुओं एवं मुर्गियों की गणना की जाती है। देश में पहली पशुगणना दिसंबर, 1919 से अप्रैल, 1920 के मध्य हुई थी।
❖ वर्ष 1951 में स्वतंत्र भारत में प्रथम पशुगणना की गई थी।
❖ 2018-19 में सर्वप्रथम ऑनलाइन पशुगणना हुई थी।
❖ 20वीं पशुगणना की शुरुआत 27 जनवरी, 2019 को हुई तथा मई 2019 में पूर्ण हुई।
❖ 20वीं पशुगणना में दिल्ली को छोड़कर सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल थे। राज्य पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा 16 अक्टूबर 2019 को 20वीं पशुगणना की रिपोर्ट जारी की गई।
❖ 20वीं पशुगणना डेयरी व पशुपालन विभाग द्वारा की गई जबकि इससे पूर्व यह पशुगणना राजस्व विभाग द्वारा की जाती थी।
❖ वर्ष 2019 में दिल्ली को प्रथम बार गणना में शामिल किया गया है।
❖ मांस एवं जलीय उत्पादन में भारत में हरियाणा का प्रतिशत योगदान 2.5% है।
❖ राज्य में सबसे कम पशुधन वाला जिला पंचकूला है।
❖ वर्ष 2017 में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (कुत्ता प्रजनन और विपणन) नियम पारित किया गया।
❖ राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR) भारत में पशुधन और कुक्कुट की नई नस्लों के पंजीकरण के लिए नोडल एजेंसी है।
❖ 20वीं पशुधन गणना 2019 के अनुसार, राज्य में कुल पशुधन 71.02 लाख है।
हरियाणा: पशु सांख्यिकी (20वीं जनगणना 2019)
| पशुधन (मवेशी) | 20वीं जनगणना 2019 |
|---|---|
| गाय | 19.32 लाख |
| भैंस | 43.76 लाख |
| भेड़ | 2.88 लाख |
| बकरी | 3.36 लाख |
| घोड़े एवं टट्टू | 16 हजार |
| खच्चर | 2.5 हजार |
| गधा | 8 सौ |
| सूअर | 1.08 लाख |
| ऊँट | 5.1 हजार |
| कुत्ता | 61.7 हजार |
❖ राज्य के अधिकांश किसान गाय व भैंस पालते हैं। प्रदेश की मुर्रा नस्ल की भैंसें संपूर्ण भारत में प्रसिद्ध हैं।
❖ राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार हरियाणा राज्य में देश की पशुधन संख्या का 2.10 प्रतिशत है लेकिन 119.65 लाख टन दूध का योगदान है जो देश के कुल दूध उत्पादन का 5.19 प्रतिशत से अधिक है।
❖ राज्य में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 1098 ग्राम है जबकि राष्ट्रीय औसत 459 ग्राम के मुकाबले में देश में नंबर स्थान पर है।
❖ महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में एक बॉर्बी बैंक अवस्थित है, जहाँ तरल नाइट्रोजन प्लांट लगा हुआ है।
राज्य के प्रमुख पशुधन वाले शीर्ष जिले (घटते क्रम में)
| पशुधन (मवेशी) | प्रमुख जिले |
|---|---|
| गाय | सिरसा, हिसार, करनाल |
| भैंस | हिसार, जींद, कैथल |
| भेड़ | भिवानी, हिसार, सिरसा |
| बकरी | सिरसा, महेंद्रगढ़, भिवानी |
| घोड़ा | गुरुग्राम, करनाल, भिवानी |
| खच्चर | झज्जर, रेवाड़ी, सिरसा |
| ऊँट | सिरसा, भिवानी, महेंद्रगढ़ |
| सूअर | सोनीपत, झज्जर, करनाल |
| कुत्ता | गुरुग्राम, भिवानी, सिरसा |
| गधा | पलवल, गुरुग्राम, भिवानी |
राज्य में पशुपालन
❖ मुर्रा भैंसों को ‘हरियाणा का काला सोना’ या ‘सोने की खान’ कहा जाता है।
❖ हरियाणा में गायों की साहीवाल तथा हरियाणवी नस्लें प्रमुख हैं।
❖ राज्य में पशुओं को पशु चिकित्सा व प्रजनन सेवाएं प्रदान करने के लिए औसतन 3 गांव पर एक पशु चिकित्सा संस्था है।
❖ आर्थिक सर्वेक्षण 2023–24 के अनुसार, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य के 71.26 लाख पशुधन संख्या को 2857 पशु संस्थाओं (राजकीय पशु अस्पताल एवं राजकीय पशु चिकित्सा औषधालयों) की सुव्यवस्थित संरचना के द्वारा राज्य के पशुपालकों को निःशुल्क पशु स्वास्थ्य एवं पशु प्रजनन सेवाएं प्रदान कर रहा है।
❖ 20वीं पशु गणना 2019 के अनुसार, राज्य में अधिकतम पशुधन वाले जिले (घटते क्रम में) क्रमशः: हिसार, सिरसा, जींद, भिवानी (दादरी सहित) व कैथल हैं तथा सबसे कम पशुधन संख्या वाले जिले (बढ़ते क्रम में) क्रमशः: पंचकूला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, चरखी-दादरी व मेवात हैं।
❖ एशिया का सबसे बड़ा पशु फार्म हिसार जिले में अवस्थित है।
❖ पशु पशु चिकित्सा केंद्र सह प्रशिक्षण चिकित्सालय पंचकूला में अवस्थित है।
❖ ‘बुक्केट रोग जांच प्रयोगशाला’ की स्थापना वर्ष 1988–89 में धनासर (कुरुक्षेत्र) में की गई। राज्य में स्पर्म केंद्र हिसार, गुरुग्राम व जगाधरी में स्थित हैं।
❖ हरियाणा अनुसूचित जातियों के लोगों के पशुओं का मुफ्त बीमा करने वाला देश का पहला व एकमात्र राज्य है।
पशुपालन एवं डेयरी विकास संबंधी संस्थान
❖ राज्य में पशुपालन एवं डेयरी विकास हेतु अनेक संस्थानों की स्थापना की गई है, जो निम्नलिखित हैं—
राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान
❖ इसकी स्थापना वर्ष 1923 में इम्पीरियल इंस्टिट्यूट ऑफ एनिमल हसबैंड्री एंड डेयरी के रूप में बैंगलुरु (कर्नाटक) में की गई थी। यह संस्थान हरियाणा के करनाल में अवस्थित है।
❖ वर्ष 1936 में इस संस्था को विस्तृत रूप दिया गया और स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1947 में इसका नया नाम ‘राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान’ रखा गया।
❖ वर्ष 1955 में ‘राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान’ को करनाल (हरियाणा) में स्थानांतरित किया गया। वर्ष 1989 में इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी घोषित किया गया।
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (NRCE)
❖ घोड़ों के स्वास्थ्य व उत्पादन पर अनुसंधान हेतु 7वीं पंचवर्षीय योजना में 7 जनवरी, 1986 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत सिरसा रोड (हिसार) में राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया। अंबाला व हिसार में दो राज्य-स्तरीय सुअर फार्म कार्यरत हैं।
हरियाणा डेयरी विकास सहकारी प्रबंध लिमिटेड
❖ राज्य में वर्ष 1970 में डेयरी कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई थी। यह निगम राज्य में 31 मार्च, 1977 तक डेयरी विकास का कार्यभार संभालता था।
❖ इसके बाद राज्य में गुजरात के आनन्द पैटर्न के आधार पर त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाने के लिए सहकारी डेयरी प्रबंध स्थापित किया गया।
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय
❖ इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1 दिसंबर, 2010 को किया गया था। यह विश्वविद्यालय हिसार में स्थित है। इस विश्वविद्यालय से 6 महाविद्यालय सम्बद्ध हैं—
❖ पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय
❖ पशु चिकित्सा जनस्वास्थ्य एवं बायो-मेडिकल अनुसंधान संस्थान
❖ मत्स्य विज्ञान संस्थान
❖ पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान
❖ डेयरी तकनीकी संस्थान
❖ पशु विज्ञान महाविद्यालय
राज्य के अन्य पशुधन विकास एवं प्रशिक्षण संबंधी संस्थान
| संस्थान | स्थापना वर्ष | केंद्र |
|---|---|---|
| केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान | 1985 | हिसार |
| राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान | 1986 | हिसार |
| पशु चिकित्सा टीकाकरण संस्थान | — | हिसार |
| हरियाणा पशु चिकित्सा प्रशिक्षण संस्थान | 2001 | हिसार |
पशुपालन एवं डेयरी विकास हेतु संचालित योजनाएँ
❖ राज्य सरकार द्वारा पशुपालन एवं डेयरी विकास हेतु संचालित प्रमुख योजनाएँ निम्नलिखित हैं—
पशु बीमा योजना
❖ पशु बीमा योजना 29 जुलाई, 2016 को झज्जर से शुरू की गई। इस योजना के अन्तर्गत बड़े पशुओं (गाय, भैंस, घोड़े, गधे एवं ऊँट आदि) के लिए ₹ 100 तथा छोटे पशुओं (भेड़, बकरी एवं सूअर आदि) के लिए ₹ 25 का प्रीमियम अदा करने पर तीन वर्ष के लिए बीमा कराया जाता है।
❖ प्रत्येक लाभार्थी 5 बड़े पशुओं और 50 छोटे पशुओं तक का बीमा करा सकते हैं। इस योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति के परिवारों के पशुओं का मुफ्त बीमा कराया जाता है।
हरियाणा नस्ल सुधार कार्यक्रम/योजना
❖ इस योजना के तहत यदि कोई पशुपालक हरियाणा नस्ल की गाय पालता है और गाय का दूध उत्पादन 1600–2000 लीटर प्रति व्यांत है तो ऐसी गाय के पालक को ₹ 5000 की प्रोत्साहन राशि तथा जिन पशुपालकों की गायों का दूध उत्पादन 2000 लीटर प्रति व्यांत से ज्यादा है, तो ऐसे गाय पालकों को ₹ 10000 की प्रोत्साहन राशि हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड द्वारा दी जाएगी। इस केंद्रीय योजना के अन्तर्गत एक हजार की अतिरिक्त राशि अलग से सहायता के रूप में दी जाएगी।
पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड योजना
❖ इस योजना के तहत किसान को गाय, भैंस, बकरी, सूअर, मुर्गी पालने वाले पशुपालकों को पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाते हैं और इस कार्ड से किसी भी पशुपालक को बिना किसी गारंटी के ₹ 1.60 लाख का ऋण मिलता है। हालांकि इससे ऊपर के ऋण के लिए गारंटी देनी होगी।
❖ 7 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से अधिकतम 3 लाख रुपये तक की ऋण राशि पर केंद्र सरकार को ब्याज में अनुदान दिया जाएगा।
बांध मुक्त पशुधन योजना
❖ यह योजना प्रति पशु उत्पादन बढ़ाने के लिए वर्ष 2009–10 में शुरू की गई थी। इस योजना का प्रकाशन राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत किया गया।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशुधन सुरक्षा बीमा योजना
❖ इस योजना के अन्तर्गत सामान्य श्रेणी के पशुपालक एक वर्ष के लिए अपने पांच बड़े पशुओं (गाय, भैंस, घोड़ा, ऊँट आदि) का बीमा करा सकते हैं।
❖ इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक बड़े जानवर के लिए ₹ 100–300 तथा छोटे पशुओं (भेड़, बकरी, सूअर आदि) के लिए ₹ 25 की दर से एक वर्ष के लिए बीमा कराया जा सकता है।
सांझी डेयरी योजना
❖ इस योजना को 1 अप्रैल 2023 को लॉन्च किया गया।
❖ इस योजना के तहत पंचायतों की जमीन पर एक शेड बनाया जाएगा, जिसमें जिन पशुपालकों के पास अपने पशु बांधने के लिए कोई स्थान नहीं है, वे इस कॉमन शेड में अपने पशुओं को रख सकेंगे।
❖ इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सहकारिता विभाग द्वारा किया जाएगा।
पशुधन विकास वाहिनी योजना
❖ राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पशु पालकों को पशुओं के संबंध में 24 घंटे जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पशुधन विकास वाहिनी योजना की शुरुआत की गई है।
❖ इससे पशुओं के बारे में पशु पालकों को जानकारी प्राप्त होगी तथा पशुपालन एवं डेयरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
बायोगैस प्लांट स्थापित करने हेतु अनुदान योजना
❖ इस योजना के अन्तर्गत किसानों को बायोगैस प्लांट स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
❖ यह योजना पंचायती केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुओं के अपशिष्ट पदार्थों के विघटन से बायोगैस तथा जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ाना है।
पशुपालन के विकास हेतु सरकार के प्रयास
❖ राज्य में पशुधन को पशु चिकित्सा एवं प्रजनन सेवाएं देने के लिए 2,879 पशु चिकित्सा संस्थान स्थापित किए जा चुके हैं।
❖ पशु उत्पादकता में वृद्धि हेतु बांध मुक्त पशुधन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। वर्ष 2010–11 में दो पॉलीक्लीनिकों का निर्माण सोनीपत तथा भिवानी में किया गया है, दो अन्य का सिरसा एवं रोहतक में किया जाएगा।
❖ पंचकूला में एक आधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र एवं प्रशिक्षण चिकित्सालय की स्थापना की जा रही है। राज्य के 15 जिलों में पशु बीमा योजना लागू की गई है।
❖ पशुधन के विकास के लिए हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड का गठन वर्ष 2007–08 में किया गया है। पशुधन विकास बोर्ड द्वारा अश्व जाति के पशुओं के उत्पादन के लिए एक नई उप-परियोजना अश्व उत्कृष्ट केंद्र, हिसार में स्थापित की गई है।
❖ राज्य में महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हरियाणा महिला डेयरी परियोजना शुरू की गई है।
❖ राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पशु पालकों को पशुओं के संबंध में 24 घंटे जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पशुधन विकास वाहिनी नामक योजना शुरू की गई है।
❖ हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है, जिसमें दुग्धारू पशुओं की नस्ल सुधार एवं संरक्षण के लिए एक हरियाणा मुर्रा भैंस तथा अन्य दुग्धारू पशु नस्ल अधिनियम, 2001 बनाया गया है।
❖ गोवंश व भैंसों के प्रजनन व विकास के लिए 12–13 जनवरी, 2000 को सरकार ने हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड की स्थापना की।
❖ राज्य में हर पशु का ज्ञान नामक मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा बड़े जानवरों का फोटो सहित पूरा विवरण एकत्रित किया जाता है।
❖ राज्य में पशुधन संरक्षण के लिए पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत की गई है।
❖ राज्य में अच्छी गुणवत्ता के पशुओं के पालन को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष जिला स्तरीय प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाती हैं।
❖ राज्य में हरियाणा तथा साहीवाल नस्ल की गायों की रिकॉर्डिंग शुरू की गई है। इसके तहत दूध उत्पादन के आधार पर पालकों को ₹ 5,000 से ₹ 20,000 तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है।
❖ राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए ‘हाईटेक कॉमर्शियल डेयरी’ का निर्माण किया जा रहा है।
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
❖ हरियाणा राज्य में प्रथम गोशाला 24 दिसंबर 1878 में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा किया गया।
❖ राज्य में युवा अनुसंधान एवं कौशल विकास केंद्र की स्थापना नानौंद (हिसार) में की गई है।
❖ मुर्रा नस्ल की भैंस को एशियन ट्रैक्टर की संज्ञा दी जाती है।
❖ हाल ही में गोवंश की सुरक्षा के लिए सख्त कानून लागू गया है, जिसके तहत गौ हत्या करने पर दस वर्ष तक की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
❖ मार्च 2023 तक हरियाणा में 632 गोशालाएं थी।
❖ 18 मार्च 2015 से राज्य में देसी गायों के लिए आधार कार्ड पहचान योजना चलाई गई थी।
❖ संत गोपालदास राज्य में गौचारण भूमि कब्जा मुक्त आंदोलन के जनक हैं।
❖ राज्य के जखौड़ा (झज्जर) स्थान पर पशुओं का सबसे बड़ा मेला लगता है।
❖ लाला लाजपत राय पशुविज्ञान एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा सर्वाधिक ऊन देने वाली भेड़ की नस्ल हंसल भेड़ विकसित की है।
❖ राज्य में प्रथम बार पशु जनगणना में स्मार्ट फोन व टैबलेट का प्रयोग किया गया है।
❖ देश की पहली गधी (हलारी नस्ल) के दूध की डेयरी हिसार में स्थापित की गई है।
❖ कुक्कुट रोग जांच प्रयोगशाला घांसर (कुरुक्षेत्र) में स्थित है।
❖ मत्स्य पालन (झींगा उत्पादन) में हरियाणा देश में प्रथम स्थान पर है।
❖ सघन पशु विकास परियोजना सर्वप्रथम भिवानी में शुरू किया गया था।
❖ हरियाणा के शेरला गांव (भिवानी) में एक लघु दुग्ध संयंत्र स्थापित किया जायेगा जिसमें मिठाईयां भी बनाई जाएंगी।
❖ हरियाणा के जखौड़ा (झज्जर) में सबसे बड़ा वार्षिक पशु मेला लगता है। इस मेले का प्रमुख आकर्षण केंद्र मुर्रा भैंस होती है।
Important Links
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1. Agriculture and Animal Husbandry of Haryana क्या है?
Agriculture and Animal Husbandry of Haryana राज्य की अर्थव्यवस्था के दो मुख्य स्तंभ हैं। हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है जहाँ लगभग 70% लोग कृषि पर निर्भर हैं और यह देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
2. Agriculture and Animal Husbandry of Haryana में मुख्य फसलें कौन-कौन सी हैं?
Agriculture and Animal Husbandry of Haryana के अंतर्गत प्रमुख फसलों में गेहूँ, धान, बाजरा, सरसों, कपास और गन्ना शामिल हैं। हरियाणा देश के केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान देता है और कृषि उत्पादन में अग्रणी राज्यों में से एक है।
3. Animal Husbandry of Haryana में कौन-कौन से पशु प्रमुख हैं?
Agriculture and Animal Husbandry of Haryana के अनुसार राज्य में गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि प्रमुख पशु हैं। हरियाणा की मुर्रा भैंस विशेष रूप से प्रसिद्ध है और इसे “काला सोना” भी कहा जाता है, जो दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है।
4. Agriculture and Animal Husbandry of Haryana का आर्थिक महत्व क्या है?
Agriculture and Animal Husbandry of Haryana राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण रोजगार का प्रमुख स्रोत है। कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और डेयरी सेक्टर हरियाणा को देश में अग्रणी बनाता है।
5. Agriculture and Animal Husbandry of Haryana के नोट्स कहाँ से पढ़ें?
आप Agriculture and Animal Husbandry of Haryana से जुड़े विस्तृत नोट्स और PDF आसानी से www.hrgk.in जैसी वेबसाइट पर पढ़ और डाउनलोड कर सकते हैं, जहाँ Haryana GK के सभी टॉपिक्स exam-oriented तरीके से उपलब्ध हैं।
