यदि आप हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) की तैयारी कर रहे हैं, तो “Haryana GK: Drainage System and Lakes of Haryana Notes PDF Download हरियाणा का अपवाह तन्त्र एवं झीलें” एक महत्वपूर्ण विषय है। हरियाणा का अपवाह तंत्र और झीलें राज्य के भौगोलिक स्वरूप को समझने में अहम भूमिका निभाती हैं, जिनमें प्रमुख नदियां, मौसमी धाराएं और प्रसिद्ध झीलें शामिल हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हरियाणा के अपवाह तंत्र एवं झीलों से संबंधित सरल और विस्तृत नोट्स प्रदान करेंगे, जिससे आपकी परीक्षा की तैयारी और बेहतर हो सके। साथ ही, आप यहां से इन नोट्स का PDF डाउनलोड करके आसानी से पुनरावृत्ति भी कर सकते हैं।
अपवाह तंत्र
❖ प्रारम्भिक काल से ही हरियाणा जल संसाधन बहुल प्रदेश रहा है।
❖ यह प्रदेश नदियों, नालों व अन्य जल स्रोतों की प्रचुरता होने के कारण आरम्भ से ही कृषि प्रधान व अन्न के भण्डार से परिपूर्ण रहा है।
❖ राज्य में गंगा, सतलुज, यमुना आदि प्रमुख नदियों का मैदान विस्तृत है।
❖ हालाँकि राज्य का अधिकांश भाग गंगा व सतलुज नदियों के मध्य जलविभाजक के रूप में कार्य करता है।
❖ इसी कारण ये प्रमुख नदियाँ राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र से होकर निकल जाती हैं।
❖ राज्य का प्राचीन प्रमुख नदी सरस्वती वर्तमान में लगभग विलुप्त नदी बन चुकी है फिर भी राज्य में अनेक छोटी-बड़ी नदियाँ बहती हैं, जिनमें यमुना, घग्गर, मारकण्डा, साहिबी, टांगरी, इन्द्रावती, इन्दौरी आदि प्रवाहित होती हैं।
इन नदियों का विवरण निम्न प्रकार है –
उत्तरी अपवाह की नदियाँ
यमुना नदी
❖ इसका उद्गम उत्तराखण्ड के पास यमुनोत्री से होता है। यह नित्यवाही नदी है।
❖ यह हरियाणा में छोटे हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाती है।
❖ हरियाणा में यह यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत तथा फरीदाबाद जिलों से होकर गुजरती है।
❖ यमुना नदी ताजेवाला के उत्तर में कलेसर के निकट हरियाणा के यमुनानगर जिले में राज्य की सीमा में प्रवेश करती है और पलवल के हसनपुर नामक स्थान से पूर्व दिशा की ओर मुड़कर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की सीमा में प्रवेश करती है।
❖ राज्य में यमुनानगर जिले में यमुना नदी पर ताजेवाला में हथिनी कुंड बाँध बना हुआ है।
❖ यहाँ हथिनी कुंड से दो मुख्य नहरें पूर्वी यमुना नहर तथा पश्चिमी यमुना नहर निकाली गई हैं जिसमें से पूर्वी यमुना नहर से उत्तर में तथा पश्चिमी यमुना नहर से हरियाणा (करनाल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला, हिसार, रोहतक तथा जींद) में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है।
❖ यमुना नदी हरियाणा की पूर्वी सीमा बनाती है।
❖ यमुना, गंगा नदी की सबसे लम्बी सहायक नदी है।
❖ हरियाणा में इसकी सहायक नदियाँ सोम (सोम), पथराला, बूढ़ी यमुना नदी है।
❖ यमुना नदी हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के बीच 320 किमी लम्बी सीमा रेखा बनाती है।
यमुना की सहायक नदियाँ
❖ यमुना की सहायक सोम्ब (सोम) नदी का उद्गम आदिबद्री (यमुनानगर) के निकट हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित शिवालिक पहाड़ियों से होता है।
❖ यह नदी दादूपुर गाँव के निकट यमुना नदी से मिल जाती है। इस नदी का प्राचीन नाम सिन्धिनी नदी है।
❖ 1875-76 में दादूपुर में पथराला बैराज बनाया गया था, जहाँ सोम नदी हरियाणा में पश्चिमी यमुना नहर से मिलती है।
❖ पथराला नदी इसकी सहायक नदी है। पथराला नदी को बाली नदी के नाम से भी जाना जाता है।
❖ यमुना नदी से हनुमान गंगा का मिलन हरियाणा के हनुमान चट्टी में होता है।
❖ ठापना नदी हरियाणा की एकमात्र नीली नदी (प्रदूषण रहित) नदी है।
सरस्वती नदी
❖ ‘महाभारत’ में सरस्वती नदी को अन्तरक तीर्थ कहा गया है।
❖ यमुनानगर के आदिबद्री (यमुनानगर) नामक स्थान से इसका प्रवेश हरियाणा राज्य में होता है।
❖ यह नदी हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पेहोवा से निकलकर पंजाब में प्रवेश करती है।
❖ भूगोलवेत्ताओं के अनुसार इस नदी का उद्गम उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के हर-की-दून ग्लेशियर से होता है।
❖ सरस्वती नदी में भैणी के निकट अन्य छोटी नदी छुटांग नदी मिलती है।
❖ सरस्वती नदी कुरुक्षेत्र, अंबाला और कैथल जिलों से होकर पंजाब के संगरूर जिले में शत्राणा नामक स्थान पर घग्गर नदी में मिल जाती है।
❖ राज्य में सरस्वती नदी पुनरुद्धार योजना की शुरुआत 21 अप्रैल 2015 को की गई है।
❖ यह नदी हिमाचल प्रदेश की बर्फीली पहाड़ियों से निकलती है। यह लार, भवानीपुर, बालछप्पर, खेड़ा, पेहोवा, सिरसा में बहती है।
❖ यह घग्गर में मिलकर भटनेर (राजस्थान) में प्रवेश कर जाती है। प्राचीनकाल में यह बालसमन्द नदी थी, किन्तु वर्तमान में यह घग्गर नदी बनकर रह गई है।
❖ ऋग्वेद काल में यह बहुत बड़ी और पवित्र नदी थी, जो अब अरब सागर में मिल जाती थी।
घग्गर नदी
❖ यह मौसमी नदी है। यह डगशाई (हिमाचल प्रदेश) से निकलती है।
❖ कौशल्या, टांगरी, सरस्वती, चौटांग तथा झाजरा हरियाणा में घग्गर की सहायक नदियाँ हैं।
❖ यह पंचकूला, कैथल, अंबाला, पटियाला (पंजाब), सिरसा और फतेहाबाद में बहती हुई राजस्थान के हनुमानगढ़ के समीप मरुस्थल क्षेत्र में विलुप्त हो जाती है। सिरसा के दक्षिण-पश्चिमी भाग में यह नदी कई जल वितरिकाओं में बंटकर थार के मरुस्थलीय क्षेत्र में विलीन हो जाती है।
❖ प्राचीन काल में घग्गर नदी को पाकिस्तान में ‘नारा नदी’ कहा जाता था।
❖ घग्गर नदी को हाकर्रा नदी, हरियाणा का शोक तथा मृत नदी के नाम से भी जाना जाता है।
❖ यह नदी हरियाणा के पाँच जिलों- अंबाला, पंचकूला, फतेहाबाद, सिरसा तथा कैथल से होकर गुजरती है।
❖ राज्य में इस नदी की लंबाई 241 किमी है।
❖ प्राचीन हाकड़ा संस्कृति इस नदी के किनारे ही फली-फूली है।
❖ घग्गर की सहायक कौशल्या नदी राज्य में 20 किमी तक बहने के बाद पंचकूला के पिंजौर नामक स्थान पर घग्गर नदी में मिल जाती है।
❖ घग्गर द्वारा निर्मित बाढ़ का मैदान नैली कहलाता है।
❖ इस नदी के किनारे कालीबंगा सभ्यता स्थल विकसित हुआ था।
दक्षिणी अपवाह की नदियाँ
टांगरी नदी
❖ यह मोरनी की पहाड़ियों से निकलती है। यह अंबाला में बहती हुई राजस्थान में प्रवेश कर जाती है।
❖ राज्य में इस नदी की लंबाई 70 किमी है। बलियाली, आमरी नदी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
❖ यह मारकण्डा की सहायक नदी है। यह मुलाना के समीप मारकण्डा नदी में मिल जाती है।
मारकण्डा नदी
❖ मारकण्डा नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन स्थान पर स्थित शिवालिक की पहाड़ियों की धरतीधर श्रेणियों से होता है।
❖ प्राचीन काल में इसे अरुणा नदी के नाम से जाना जाता था।
❖ अनेक छोटी धाराओं व पहाड़ी नालों से मिलने के पश्चात यह नदी इस राज्य के अंबाला, कुरुक्षेत्र जिलों से प्रवाहित होती हुई नैलसा झील में गिरती है।
❖ टांगरी, नकटी, रण तथा बेगना इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
❖ ऋषि मार्कण्डेय के नाम पर इस नदी का नाम मारकण्डा पड़ा।
❖ यह कालाअम्ब से हरियाणा में प्रवेश कर अंबाला, कुरुक्षेत्र, शाहाबाद में बहती है।
❖ यह गंगा-सिंधु जल विभाजक की छोटी नदी है। यह सरस्वती नदी की सहायक है। इसमें बाढ़ के कारण अधिक निक्षेप पाए जाते हैं। टांगरी इसकी प्रमुख सहायक नदी है।
चौटांग नदी
❖ इस नदी का उद्गम स्थल शिवालिक की पहाड़ियाँ हैं।
❖ 416 किमी लंबी यह नदी करनाल, यमुनानगर, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, हिसार, फतेहाबाद तथा सिरसा जिलों से बहती हुई राजस्थान के भटनेर नामक स्थान के निकट घग्गर नदी में जा मिलती है।
साहिबी नदी
❖ दक्षिणी हरियाणा की प्रमुख नदी साहिबी नदी का उद्गम राजस्थान के सीकर जिले में अरावली पहाड़ियों में स्थित जीणमाता के निकट बरहड़ पहाड़ी (मेवात पहाड़ियाँ) से निकलती है।
❖ नजफगढ़ नाले के द्वारा साहिबी नदी अंततः यमुना नदी में जा मिलती है।
❖ कोट-कासिम के निकट यह हरियाणा में प्रवेश कर रेवाड़ी जिले में प्रवाहित होती है।
❖ यह नदी रेवाड़ी, खलीलपुर, पटौदी, झज्जर, गुरुग्राम, रोहतक में बहती है। यह दिल्ली में यमुना नदी में मिल जाती है। यह दक्षिण हरियाणा की मुख्य नदी है।
कृष्णावती नदी
❖ यह जयपुर से निकल कर हरियाणा में प्रवेश करती है। यह नीमराना, रेवाड़ी, कोसली, झज्जर, सुरेठा में बहती है।
❖ यह महेन्द्रगढ़ जिले में लुप्त हो जाती है।
इन्दौरी नदी
❖ यह नदी हरियाणा के नूंह (तत्कालीन मेवात) जिले के नूंह कस्बे के निकट मेवात पहाड़ियों से निकलती है।
❖ प्राचीन इन्दौरी किले के निकट होने के कारण इस नदी को ‘इन्दौरी’ कहा जाता है।
❖ यह राजस्थान में बैंकर, एक शाखा रेवाड़ी के पास साहिबी नदी से मिलती है तथा दूसरी शाखा कुछ अन्य बरसाती नालों का पानी लेने के बाद पटौदी के निकट साहिबी नदी में मिल जाती है।
दोहान नदी
❖ दोहान नदी राजस्थान के नीम का थाना क्षेत्र से निकलती है।
❖ यह नदी हरियाणा के महेन्द्रगढ़ में प्रवेश करती है तथा बर्ड नामक स्थान पर विलुप्त हो जाती है।
❖ दोहान नदी की लम्बाई हरियाणा में 50 किमी है।
राज्य की प्रमुख झीलें
❖ हरियाणा की अधिकांश झीलें मानव निर्मित हैं किन्तु कुछ झीलें प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण अस्तित्व में आई हैं।
❖ हरियाणा की झीलों का विवरण निम्न प्रकार है—
| झील | तथ्य |
|---|---|
| दमदमा झील | दमदमा झील हरियाणा की सबसे बड़ी मीठे जल की झील है जो सोहना (गुरुग्राम) से 8 किमी की दूरी पर स्थित है। दमदमा झील का कुल क्षेत्रफल 3000 एकड़ (12.14 वर्ग किमी) है। झील के बीच में ‘ड्रीम आइलैंड एडवेंचर रिसॉर्ट’ है। यह झील अरावली की पहाड़ियों से घिरी आकर्षक झील है। दमदमा झील का निर्माण 1919 ई. में अंग्रेजों ने वर्षा के जल का संग्रहण करने के उद्देश्य से करवाया था। इस झील की आकृति अर्धचन्द्र के आकार की है। यह झील लगभग 190 पक्षी प्रजातियों का निवास स्थल है। इसे वर्ष 1979 में पर्यटन स्थल घोषित किया गया। यहाँ सर्दियों में अनेक प्रवासी पक्षी भी आते हैं। |
| सुल्तानपुर झील | 2 जून, 1971 को ‘जंगली जीव संरक्षण अधिनियम 1959 की धारा 8 के अंतर्गत वर्ष 1989 में इसे पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया। 5 जुलाई, 1991 को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 35 के तहत इसे राष्ट्रीय पार्क का दर्जा दिया गया। सुल्तानपुर झील में प्रतिवर्ष 100 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं। सुल्तानपुर झील का कुल क्षेत्रफल 325.17 एकड़ है। यहाँ पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह झील प्रवासी पक्षियों (विशेषकर साइबेरियन सारस) के लिए प्रसिद्ध है। |
| बर्ड झील | यह मूल रूप से एक आर्द्र भूमि है। इसे ‘बर्ड आर्द्र भूमि’ भी कहते हैं। यह गुरुग्राम के निकट कृष्णावती तथा पुखरेवती नदी के संगम पर स्थित है। |
| खलीलपुर झील | यह पटौदी तहसील में स्थित है। ग्रीष्म ऋतु में यह झील सूख जाती है। इस झील का क्षेत्रफल 607 हेक्टेयर है। |
| भीम कुण्ड | यह गुरुग्राम के भीम नगर में 10 एकड़ में स्थित है। पिंचावड़ा जोहड़ गुरुग्राम में है जिसे भीमकुण्ड भी कहा जाता है। |
झज्जर की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| भिंडावास झील | मानव निर्मित यह झील झज्जर जिले में स्थित एक पक्षी विहार है। इसे वन्यजीव विहार के रूप में 1986 में निर्मित किया गया था। यह झील लगभग 1017 एकड़ में विस्तृत है तथा इस पक्षी विहार में 266 प्रजातियों के 30000 पक्षी देखे जा सकते हैं। इसे 3 जून 2009 को भारत सरकार ने एक पक्षी विहार के रूप में मान्यता दी। यह झील हरियाणा की सबसे बड़ी आर्द्रभूमि है। वर्ष 2021 में भिंडावास झील को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। इस झील को ‘टापुओं वाली झील’ तथा ‘बर्ड्स पैराडाइज झील’ के रूप में जाना जाता है। पर्यटकों के लिए इस झील पर राइड बोट की सुविधा भी उपलब्ध है। इस झील पर इला फाउंडेशन, पुणे (महाराष्ट्र) द्वारा एक पुस्तक भी लिखी गई है। |
फरीदाबाद की झीलें
| झील | तथ्य |
|---|---|
| बड़खल झील | यह हरियाणा की प्रमुख झील है। यह एक मानव निर्मित झील है। इसका निर्माण सिंचाई परियोजना के अंतर्गत वर्ष 1947 में किया गया था। बड़खल झील अरावली की पहाड़ियों से घिरे बड़खल गाँव (फरीदाबाद) के निकट स्थित है। यह झील 206 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत है। वर्ष 1947 में एक सिंचाई परियोजना के तहत दो छोटी पहाड़ियों को जोड़कर 664.5 मीटर लंबी तथा 6 मीटर चौड़ी बाँध का निर्माण किया गया। इस झील पर प्रत्येक बसंत ऋतु में ‘फ्लावर शो’ का आयोजन किया जाता है। बड़खल झील को वर्ष 1969 में हरियाणा पर्यटन निगम ने पर्यटन स्थल घोषित किया तथा पर्यटन विभाग ने यहाँ भ्रमण तथा नौकायन की पूर्ण व्यवस्था की। |
| सूरजकुण्ड | इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में तोमर शासक सूरजमल ने किया था। बाद में अनंगपाल ने इसके निर्माण को पूरा किया। सूरजकुण्ड झील के पास झील वन्यजीव अभयारण्य स्थित है। इस झील को मयूर झील भी कहा जाता है। इस झील की आकृति अर्धवृत्ताकार है। सूरजकुण्ड में प्रत्येक वर्ष 1 फरवरी से 15 फरवरी तक सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला आयोजित किया जाता है। |
नूंह (मेवात) की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| कोटला झील | यह मानव निर्मित झील नूंह जिले के कोटला गाँव में स्थित है। कोटला झील मेवात क्षेत्र की जीवनरेखा है। कोटला झील का कुल क्षेत्रफल 20 वर्ग किमी है। यह झील अरावली की पहाड़ियों की शृंखला के पर्व में स्थित है। इस झील के निर्माण से खानपुर, नूंह, मेवात के कोटला, मोहम्मदपुर तथा अकरा आदि को विशेष लाभ प्राप्त हुआ है। |
करनाल की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| कर्ण झील | यह करनाल जिले के उचाना गाँव में स्थित है। इस झील को ‘महाभारत’ के पात्र कर्ण के नाम पर बनाया गया है। इसे चक्रवर्ती झील के नाम से भी जाना जाता है। कर्ण झील का जीर्णोद्धार वर्ष 1972 में किया गया। यह झील लगभग 17 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत है। इसी झील के आधार पर ही करनाल जिले का नाम पड़ा। इस झील का आकार वृत्ताकार है। |
कुरुक्षेत्र की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| ब्रह्म सरोवर | यह एशिया की सबसे बड़ी मानव-निर्मित झील है। इसका उल्लेख ‘महाभारत’ तथा ‘स्कन्द पुराण’ में भी है। ब्रह्म सरोवर के बीच में पुरुषोत्तमपुरा बाग स्थित है। इस बाग में कार्यदक्षिणी देवी मंदिर स्थित है। |
रोहतक की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| तिल्यार की झील | यह रोहतक से 2 किमी दूर स्थित है। इसका क्षेत्रफल 132 एकड़ है। तिल्यार झील के बाल में रोहतक चिड़ियाघर स्थित है। |
पलवल की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| डबचिक झील | पलवल में स्थित डबचिक झील का कुल क्षेत्रफल 22 एकड़ है। डबचिक पर्यटन स्थल के रूप में वर्ष 1975 में की गई थी। |
पंचकूला की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| टिक्कर ताल | टिक्कर ताल झील मोरनी हिल्स में स्थित है। इस झील के पास ‘एडवेंचर स्पोर्ट्स’ स्थित है। |
हिसार की झील
| झील | तथ्य |
|---|---|
| ब्लू बर्ड | हिसार में स्थित ब्लू बर्ड झील 52 एकड़ में फैली है। शतावर हर्बल पार्क तथा गाँव धुना इस झील के निकट स्थित है। पर्यटकों को घूमने के लिए इस झील के मध्य में एक टापू का निर्माण करवाया गया है। |
राज्य की अन्य झीलें
| झील | अवस्थित | झील | अवस्थित |
|---|---|---|---|
| बीबीपुर झील | कुरुक्षेत्र | सुखना झील | चंडीगढ़ |
| चंदेली झील | नूंह (मेवात) | चिल्ली झील | फतेहाबाद |
| बुलबुल झील | जींद | डाबर झील | सोनीपत |
Important Links
| Drainage System and Lakes of Haryana (Mock Test) | Click Here |
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1. Drainage System and Lakes of Haryana क्या है?
Drainage System and Lakes of Haryana में राज्य की नदियों, अपवाह तंत्र (drainage pattern) और प्रमुख झीलों का अध्ययन किया जाता है। हरियाणा का जल निकास मुख्यतः यमुना और घग्गर नदी तंत्र पर आधारित है।
2. Drainage System and Lakes of Haryana में प्रमुख नदियाँ कौन-कौन सी हैं?
Drainage System and Lakes of Haryana के अनुसार हरियाणा की प्रमुख नदियाँ यमुना, घग्गर, सरस्वती, साहिबी और मार्कंडा हैं। इनमें यमुना सबसे महत्वपूर्ण नदी है, जो राज्य की पूर्वी सीमा बनाती है।
3. Drainage System and Lakes of Haryana का स्वरूप कैसा है?
Drainage System and Lakes of Haryana मुख्य रूप से दो भागों में बंटा है—गंगा बेसिन और सिंधु बेसिन। पूर्वी भाग की नदियाँ गंगा तंत्र से जुड़ी हैं जबकि पश्चिमी भाग की नदियाँ सिंधु तंत्र में आती हैं।
4. Haryana की प्रमुख झीलें कौन-कौन सी हैं?
Drainage System and Lakes of Haryana के अंतर्गत प्रमुख झीलों में दमदमा झील, बड़खल झील, सूरजकुंड, ब्रह्म सरोवर, कर्ण झील और सुल्तानपुर झील शामिल हैं। ये झीलें प्राकृतिक व कृत्रिम दोनों प्रकार की हैं और पर्यटन के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
5. Drainage System and Lakes of Haryana के नोट्स कहाँ से पढ़ें?
आप Drainage System and Lakes of Haryana से जुड़े विस्तृत नोट्स और PDF आसानी से www.hrgk.in जैसी वेबसाइट पर पढ़ और डाउनलोड कर सकते हैं, जहाँ Haryana GK के सभी टॉपिक्स exam-oriented तरीके से उपलब्ध हैं।
