यदि आप हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) की तैयारी कर रहे हैं, तो “Haryana GK: Soil Resources of Haryana Notes PDF Download हरियाणा का मृदा संसाधन” एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। हरियाणा की मृदा संसाधन राज्य की कृषि उत्पादन क्षमता का आधार हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार की मिट्टियां जैसे दोमट, बलुई और चिकनी मिट्टी शामिल हैं। इन मृदाओं की गुणवत्ता और वितरण फसलों की उपज को सीधे प्रभावित करते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हरियाणा के मृदा संसाधनों से संबंधित सरल और विस्तृत नोट्स प्रदान करेंगे, जिससे आपकी परीक्षा की तैयारी और अधिक सशक्त होगी। साथ ही, आप यहां से इन नोट्स का PDF डाउनलोड करके त्वरित पुनरावृत्ति भी कर सकते हैं।
मृदा संसाधन
❖ हरियाणा राज्य का अधिकांश भाग मैदानी है, जिसका निर्माण यमुना, घग्घर, सरस्वती आदि नदियों द्वारा निक्षेपित जलोढ़ मृदा के कारण हुआ है।
❖ मैदानी क्षेत्रों की ये जलोढ़ मृदाएं पीले-भूरे रंग की हैं, जो उपजाऊ हैं।
❖ हरियाणा के प्रमुख कृषि योग्य क्षेत्र हैं, अतः कृषि में भौतिक-रासायनिक एवं उर्वरक गुणों के आधार पर राज्य की मृदा को निम्न 6 भागों में विभाजित किया जाता है। ये हैं—
- अत्यन्त हल्की मृदा
- हल्की मृदा
- मध्यम मृदा
- सामान्य-भारी मृदा
- भारी मृदा
- शिवालिक गिरिपदिय चट्टानी तल की मृदा
1. अत्यन्त हल्की मृदा
❖ इस मृदा को बालुका प्रधान दोमट के नाम से भी जानते हैं। यह मृदा सिरसा के दक्षिणी भाग से फतेहाबाद, भिवानी, महेन्द्रगढ़ व हिसार तक मिलती है। इसमें वनस्पति तत्वों की कमी रहती है।
❖ इस मृदा में रेत के अंशों की अधिकता पाई जाती है। इस मृदा क्षेत्र में बालुका स्तूपों की प्रधानता है।
❖ इसमें मृदा के कण असंगठित होने के कारण भारी वायु अपरदन होता है।
❖ इस मृदा में जल ग्रहण करने की क्षमता कम होती है इसलिए यह मृदा शीघ्र सूख जाती है।
❖ इन मृदाओं में मोटे अनाज (चना, बाजरा, सरसों, ज्वार, तिल आदि) और दालों की कृषि ही उपयुक्त है।
❖ सरकार इस क्षेत्रों में शुष्क भूमि कृषि (Dry Land Farming) पद्धति को बढ़ावा दे रही है।
2. हल्की मृदा
❖ इस मृदा को स्थानीय लोग रेतीली मृदा के नाम से भी जानते हैं। यह मृदा शुष्क भूमि के लिए उत्तम मानी जाती है।
❖ हल्की मृदा बलुई दोमट व दोमट मृदा का मिश्रण है, जोकि भिवानी, गुरुग्राम, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक, हिसार आदि के क्षेत्रों में मिलती है।
बालुका युक्त दोमट मृदा
❖ यह मृदा हरियाणा के दक्षिण-पश्चिमी भाग में बालुका युक्त दोमट मृदा तथा दोमट मृदा के मध्य एक पेटी के रूप में फैली है।
❖ इस मृदा में सिल्ट तथा मृत्तिका की अपेक्षा बालू की मात्रा अधिक होती है। यह शुष्क भूमि कृषि के लिए उत्तम मानी जाती है।
❖ इस मृदा में जल धारण करने की क्षमता बढ़ जाती है।
❖ वर्षा की कमी होने पर इस मृदा में फुहार सिंचाई या टपक सिंचाई द्वारा उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।
बलुई दोमट मृदा
❖ इसमें बालू, मृत्तिका व सिल्ट बराबर अनुपात में पाए जाते हैं। अतः यह मृदा नरम होती है। इस मृदा में रिसाव अधिक होता है। अतः इसमें उत्पादन के लिए सामान्य वर्षा या सिंचाई आवश्यक है।
❖ यह मृदा हरियाणा के पश्चिमी भाग में, घग्घर नदी के उत्तर में, सिरसा तहसील के कुछ गांवों में तथा डबवाली तहसील में विस्तृत है।
3. मध्यम मृदा
❖ इस मृदा में मोटी दोमट, हल्की दोमट व सामान्य दोमट मृदाएं सम्मिलित हैं।
❖ मोटी दोमट मृदा गुरुग्राम व नूंह जिले के मध्य में फिरोजपुर-झिरका के निचले क्षेत्रों में मिलती है।
❖ हल्की दोमट मृदा गुरुग्राम के उत्तरी भाग में, अंबाला के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में, नूंह के उत्तर-पश्चिमी भाग में मिलती है।
❖ सामान्य दोमट मृदा सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि क्षेत्रों में पाई जाती है।
❖ सामान्य दोमट मृदा गहरी और उपजाऊ मृदा है। यह मृदा चावल, गेहूं जैसे प्रमुख खाद्यान्न तथा कपास व गन्ना जैसे नकदी फसलों के लिए उपयोगी है।
❖ पर्याप्त वर्षा होने पर इस मृदा में अच्छी फसल होती है।
4. सामान्य भारी मृदा
❖ इस मृदा के प्रमुख क्षेत्र यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, पलवल जिलों के पूर्वी किनारे हैं।
❖ सिल्टयुक्त इस मृदा को खादर तथा नवीन खादर कहा जाता है।
❖ सामान्यतः ऊँचे भागों में पाई जाने वाली भारी मृदा को बांगर कहा जाता है।
❖ खादर मृदाओं में कंकड़ों की उपस्थिति कम होती है।
❖ बांगर मृदा यमुना नदी से दूर के या ऊँचे क्षेत्र में पाई जाती है।
5. भारी मृदा (जलोढ़ मृदा)
❖ इस मृदा को डाकर मृदा के नाम से भी जाना जाता है। इस मृदा के प्रमुख क्षेत्र थानेसर, फतेहाबाद, जगाधरी हैं।
❖ वर्षा के दौरान यह मृदा अधिक चिपचिपी हो जाती है तथा शुष्क मौसम में अधिक कठोर हो जाती है।
❖ इन मृदाओं में चिकनयुक्त सिल्ट की प्रधानता होती है।
❖ ये मृदा राज्य में बरसाती नदियों के किनारे पाई जाती है।
❖ शुष्क मौसम में इस मृदा में दरारें पड़ जाती हैं तथा धूलभरी आंधियां चलने लगती हैं। इस मृदा में जलधारण करने की क्षमता भी कम होती है।
❖ इस मृदा में गेहूं, चावल, चना तथा जौ की फसल उगाई जाती है।
❖ उर्वरकों के प्रयोग के पश्चात इन मृदाओं में उत्पादन बढ़ जाता है। इन मृदाओं में उर्वरकों का प्रयोग ज्यादा होता है।
6. शिवालिक गिरिपदीय चट्टानी तल की मृदा
❖ शिवालिक मृदा पंचकूला के कालका तहसील और अंबाला की नारायणगढ़ तहसील में पाई जाती है।
❖ पंचकूला के कालका क्षेत्र में, अंबाला के नारायणगढ़ क्षेत्र में और यमुनानगर के जगाधरी क्षेत्र में शिवालिक के गिरिपदीय प्रदेश की गिरिपदीय मृदा पाई जाती है।
❖ राज्य के दक्षिणी भाग में अरावली पर्वत की पहाड़ियों की उपस्थिति के कारण पथरीली और रेतीली मृदा पाई जाती है।
❖ नारायणगढ़ और कालका तहसीलों में इन्हें ‘घर’ तथा जगाधरी तहसीलों में इसे ‘कंडी’ के नाम से पुकारते हैं।
राज्य में मृदा अपरदन
❖ मृदा अपरदन को निर्जीव क्षरण या संवेगित हुई मृदा कहा जाता है। मृदा अपरदन से मृदा की उर्वर शक्ति कमजोर हो जाती है।
❖ यह अपरदन जल या वायु द्वारा होता है। यह मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत को नष्ट करता है।
❖ हरियाणा में जल तथा वायु दोनों ही वृहत पैमाने पर मृदा का अपरदन करते हैं।
❖ जल द्वारा मृदा अपरदन का कार्य उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र में शिवालिक के गिरिपदीय भाग में अधिक होता है।
❖ उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र में शिवालिक के गिरिपदीय भाग में वर्षा का वार्षिक औसत 100 सेमी से अधिक तथा मानसूनी वर्षा की अधिकतम गहनता 2.5 सेमी प्रतिदिन से भी अधिक होती है।
❖ पंचकूला, यमुनानगर और अंबाला जल अपरदन से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र हैं।
❖ हरियाणा के दक्षिणी तथा दक्षिण-पश्चिमी जिलों के राजस्थान से लगे क्षेत्रों में वायु द्वारा मृदा अपरदन अधिक होता है। इनमें चरखी दादरी, हिसार, भिवानी, महेन्द्रगढ़ और गुरुग्राम जिले प्रमुख हैं। राज्य के इन जिलों में बालूयुक्त मृदा पाई जाती है तथा वर्षा कम होती है।
मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन
❖ भारत सरकार ने वर्ष 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड नामक योजना का संचालन राजस्थान के सूरतगढ़ से किया है।
❖ हरियाणा राज्य में भी यह योजना मृदा परीक्षण सेवाओं को बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने व पोषक तत्व प्रबंधन तरीकों के विकास के लिए पूरे राज्य में लागू की गई है।
❖ इसका मुख्य उद्देश्य 3 वर्ष की अवधि में राज्य के सभी कृषक परिवारों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करना है।
हरियाणा की मृदाएं: एक दृष्टि में
| मृदा के प्रकार | विशेषता | विस्तार |
|---|---|---|
| अत्यन्त हल्की मृदा | चूने के अंशों का बाहुल्य, वनस्पति तत्वों का अभाव, जलधारण की क्षमता कम | हिसार, भिवानी, महेन्द्रगढ़, फतेहाबाद, सिरसा का दक्षिणी भाग |
| हल्की मृदा | ||
| (i) अपेक्षाकृत बालू दोमट | सिल्ट व मृत्तिका की अपेक्षा बालू की प्रधानता, जलधारण की क्षमता अधिक, शुष्क भूमि कृषि के लिए उत्तम | भिवानी, हिसार, रेवाड़ी, झज्जर तथा गुरुग्राम जिला |
| (ii) बलुई दोमट | बालू, मृत्तिका व सिल्ट का बराबर अनुपात, नरम मृदा, जल रिसाव अधिक | हरियाणा के पश्चिमी भाग में घग्घर के उत्तर (डबवाली व सिरसा तहसील में) |
| मध्यम मृदाएं | ||
| (i) मोटी दोमट | मोटे कण | मेवात के नूंह, फिरोजपुर, झिरका |
| (ii) हल्की दोमट | मध्यम आकार के कण | दक्षिण-पश्चिम अंबाला तथा नारायणगढ़ तहसील |
| (iii) दोमट | सुवाहित तथा उपजाऊ, अच्छी पैदावार | कैथल, सोनीपत, पानीपत, जींद, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, करनाल, फरीदाबाद |
| सामान्य भारी मृदा | सिल्टयुक्त मृदा, सिल्ट की अधिकता के कारण घटकर्मयी, जलधारण की क्षमता कम, सूखने पर अधिक कठोर | यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, सोनीपत, पानीपत, फरीदाबाद |
| भारी व बहुत भारी मृदा | चिकनयुक्त सिल्ट की प्रधानता, वर्षा में चिपचिपी, शुष्क मौसम में कठोर | थानेसर, फतेहाबाद |
राज्य में मृदा अपरदन को रोकने का उपाय
1. पंक्तिबद्ध पौधारोपण
❖ सिरसा, महेन्द्रगढ़, हिसार और भिवानी जिलों में मृदा अपरदन अधिक है। इस अपरदन को रोकने के लिए इन जिलों के शुष्कतम क्षेत्रों में खेतों के बचाव हेतु पंक्तिबद्ध पौधे लगाए जाने चाहिए।
2. वृक्षारोपण
❖ हरियाणा राज्य के दक्षिण व दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्रों में वनों का अभाव पाया जाता है। इसलिए इन क्षेत्रों में वर्षा के जल से मृदा के कटाव को सर्वाधिक नुकसान हो जाता है। इन मृदा के कटाव को रोकने के लिए वृक्षारोपण करना चाहिए ताकि वृक्षों की जड़ें मृदा को जकड़कर रख सकें।
3. पशुचारण पर नियंत्रण
❖ परती खेतों में पशुचारण को नियंत्रित किया जाना चाहिए क्योंकि स्वच्छंद रूप से घूमने वाले पशु अपने खुरों से मृदा को ढीला कर देते हैं जो बाद में अपरदित हो जाती है।
4. बाँध बनाना
❖ राज्य के पूर्वी भाग में नदियों की बाढ़ का प्रकोप कम करने के लिए बाँधों का निर्माण आवश्यक है। इस प्रक्रिया से जल के बहाव पर नियंत्रण रहेगा और मृदा संरक्षित रहेगी।
5. कृषि प्रणाली में सुधार
❖ मृदा अपरदन को कृषि प्रणाली में सुधार करके काफी हद तक रोका जा सकता है—
(i) शिवालिक के गिरिपद प्रदेश में अवनालिका को भरना।
(ii) शिवालिक पहाड़ियों में सीढ़ीदार खेत बनाना।
(iii) खेतों की मेड़बंदी करना।
(iv) समोच्च-रेखीय जुताई के माध्यम से ढलानों पर जल के वेग को नियंत्रित करना।
(v) भूमि को हवा की दिशा के समकोण पर जोतना।
मृदा परीक्षण
❖ हरियाणा राज्य के कृषि विभाग द्वारा राज्य में उप-मण्डल स्तर पर 30 भूमि एवं जल-परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
❖ इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से राज्य के किसानों को भूमि और जल परीक्षण की मुफ्त सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।
❖ राज्य में पाँच प्रयोगशालाएँ करनाल, गुरुग्राम, अंबाला, नरवाना तथा जगाधरी में स्थित हैं। इन पाँच प्रयोगशालाओं में सूक्ष्म तत्वों (लोहा, जिंक, तांबा एवं मैंगनीज का विश्लेषण करने की सुविधा उपलब्ध है।)
Important Links
| Soil Resources of Haryana (Mock Test) | Click Here |
| Haryana GK | Click Here |
| About Haryana (Wikipedia) | Click Here |
1. Soil Resources of Haryana क्या है?
Soil Resources of Haryana से तात्पर्य राज्य में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की मिट्टियों और उनके उपयोग से है। हरियाणा की मिट्टी मुख्य रूप से जलोढ़ (alluvial) है, जो कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है।
2. Soil Resources of Haryana के मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं?
Soil Resources of Haryana में प्रमुख रूप से जलोढ़ मिट्टी, रेतीली मिट्टी, मरुस्थलीय मिट्टी और शिवालिक क्षेत्र की मिट्टी शामिल हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक वर्गीकरण में reddish chestnut, arid brown और desert soils जैसे प्रकार भी पाए जाते हैं।
3. Soil Resources of Haryana की विशेषताएँ क्या हैं?
Soil Resources of Haryana की मिट्टी सामान्यतः sandy loam से लेकर clay loam तक पाई जाती है। यह मिट्टी कई जगहों पर क्षारीय (alkaline) होती है और इसमें नाइट्रोजन, जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी भी देखी जाती है।
4. Soil Resources of Haryana को प्रभावित करने वाली समस्याएँ क्या हैं?
Soil Resources of Haryana में प्रमुख समस्याओं में लवणीयता (salinity), क्षारीयता (alkalinity), जलभराव और मृदा अपरदन (soil erosion) शामिल हैं, जो कृषि उत्पादकता को प्रभावित करते हैं।
5. Soil Resources of Haryana के नोट्स कहाँ से पढ़ें या डाउनलोड करें?
आप Soil Resources of Haryana और Haryana GK से जुड़े विस्तृत नोट्स और PDF www.hrgk.in जैसी वेबसाइट पर आसानी से पढ़ और डाउनलोड कर सकते हैं, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुसार structured सामग्री उपलब्ध होती है।
