यदि आप हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) की तैयारी कर रहे हैं, तो “Haryana GK: Geographical Introduction of Haryana Notes PDF Download हरियाणा का भौगोलिक परिचय” एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। हरियाणा का भौगोलिक परिचय राज्य की स्थिति, सीमाएं, स्थलाकृति, नदियां और जलवायु को समझने में मदद करता है। यह विषय प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है और आपकी तैयारी को मजबूत बनाता है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हरियाणा के भौगोलिक परिचय से संबंधित सरल, स्पष्ट और विस्तृत नोट्स प्रदान करेंगे, जिससे आप आसानी से इस टॉपिक को समझ सकें। साथ ही, आप यहां से इन नोट्स का PDF डाउनलोड करके त्वरित पुनरावृत्ति भी कर सकते हैं।
❖ हरियाणा प्रदेश भारत के उत्तर–पश्चिमी भाग में पंजाब के मैदान के दक्षिणी भाग में 27°39′ से 30°55′ उत्तरी अक्षांश तथा 74°28′ से 77°36′ पूर्वी देशान्तर के बीच स्थित है।
❖ हरियाणा के उत्तर–पश्चिम में पंजाब, उत्तर में हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर–पूर्व में उत्तराखंड राज्य स्थित है।
❖ पूर्व में यमुना नदी उत्तर प्रदेश के साथ हरियाणा में सीमा निर्धारित करती हुई प्रवाहित होती है।
❖ हरियाणा राज्य के पश्चिम और दक्षिण–पश्चिम में राजस्थान विस्तृत है।
❖ दक्षिण–पूर्व में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली है।
❖ हरियाणा भारत का भू–आवेष्ठित राज्य है, जिसका क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किमी है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का 1.34% है।
❖ इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021 के अनुसार, राज्य में वनावरण 1603.48 वर्ग किमी है जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 3.63% है।
भू-गर्भिक संरचना
❖ प्रारंभिक काल से ही राज्य की भू-गर्भिक संरचना अस्थायी रही है। ओजोडिक काल (निर्जीव युग) तथा पैलियोजोडिक काल (जीवनयुग का प्रथम काल) के दौरान राज्य की भू-गर्भिक संरचना में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, परंतु मेसोजोडिक काल (मध्य जीव युग) के दौरान यह भाग उभरा।
❖ राज्य में नदी, नाले, पहाड़, टीलें आदि का सुचारु रूप से निर्माण सेनोजोडिक काल (तृतीय जीव युग) के दौरान हुआ।
❖ सेनोजोडिक काल में ही राज्य की भौ-स्थिति, जलवायु आदि का निर्धारण हुआ। हरियाणा राज्य घग्घर और यमुना नदियों के मध्य स्थित एक विशाल समतल मैदानी भाग है।
❖ हरियाणा के उत्तर-पूर्वी भाग में पंचकूला जिले में शिवालिक श्रेणियां तथा दक्षिणी भाग में अरावली पर्वत की अवशिष्ट पहाड़ियाँ पाई जाती हैं। इन दोनों उच्च भूमियों के मध्य यह सपाट विशाल मैदान है।
❖ हरियाणा सरकार की वेबसाइट के अनुसार हरियाणा को पाँच प्राकृतिक स्थलाकृति भागों में विभाजित किया गया है जो एक उपयुक्त भू-निर्माण पर्यावरण के व्यवस्थित अध्ययन हेतु होता है। वे हैं–
- बांगर मैदान अपर्याप्त रेतीले मैदानी रेत के टिब्बे और तल (230–350 मीटर)
- घग्घर-यमुना का मैदान या खदर का मैदान (300 मीटर से कम)
- अरावली पर्वत श्रेणियां (300–600 मीटर)
- शिवालिक पहाड़ियाँ (400 मीटर से अधिक) और
- पहाड़ी क्षेत्र या गिरिपाद मैदान (400 मीटर से कम)
❖ वर्ष 1973 में डॉ. जसवीर सिंह ने अपनी पुस्तक ‘An Agricultural Geography of Haryana’ में हरियाणा को मुख्य रूप से निम्नलिखित आठ भागों में बांटा है—
1. शिवालिक
❖ राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में शिवालिक की पहाड़ियों का विस्तार है, जिसमें मुख्यतः पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर का उत्तर-पूर्वी भाग आता है।
❖ शिवालिक पहाड़ियाँ हिमालय पर्वत की नवीनतम पहाड़ियाँ हैं। शिवालिक का निर्माण हिमालय के दक्षिण में स्थित संकरी खाई के तल का नदियों द्वारा हुए निक्षेपण के फलस्वरूप ऊपर उठने से हुआ है।
❖ ये पहाड़ियाँ अधिक ऊँची नहीं हैं। इन पर्वत श्रेणियों की ऊँचाई 900 मी से लेकर 2,300 मी तक है।
❖ इन पहाड़ियों में से घग्घर, मारकंडा, टांगरी, सरस्वती आदि नदियाँ निकलती हैं। समूचे वर्ष बहने वाली नदी का प्रवाह इस भाग में सामान्यतः मिलता है।
❖ पंचकूला से 30 किमी दूर हरियाणा की सबसे ऊँची चोटी करोह है, जो मोरनी पहाड़ियों में स्थित है। मोरनी पहाड़ियों की औसत ऊँचाई 1,467 मी है।
❖ राज्य में सर्वाधिक वर्षा शिवालिक क्षेत्र में होती है।
❖ राज्य में सर्वाधिक सदाबहार वन (चीड़, देवदार, साल, खैर) शिवालिक क्षेत्र में ही पाये जाते हैं।
❖ मोरनी (पंचकूला) राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है।
2. गिरिपद मैदान
❖ यह मैदान यमुना नदी से घग्घर नदी तक यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला जिलों तक विस्तृत है।
❖ गिरिपद मैदान (भावर) को नारायणगढ़, अंबाला में स्थानीय भाषा में ‘घर’ कहा जाता है। इस मैदान में बरसाती नदियों और तालों से बनाये गये गहरे खड्डों को पहाड़ी भाषा में ‘चो’ कहा जाता है। जगाधरी में इन गिरिपदीय मैदानों को कंडी कहा जाता है।
❖ इन क्षेत्रों में बहने वाली प्रमुख नदियाँ घग्घर और मारकण्डा हैं।
❖ इसका ढाल उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है।
❖ यह भाग अन्य भागों की तुलना में कम उपजाऊ है। इस मैदान की सामान्य ऊँचाई 300–375 मी है।
❖ यहाँ पर कंकर-पत्थर की अधिकता मिलती है। इसे ‘भावर’ भी कहते हैं।
3. जलोढ़ मैदान
❖ शिवालिक के गिरिपद क्षेत्र से अरावली तक तथा यमुना और घग्घर नदियों के मध्य विस्तृत यह उच्च भूमि का जलोढ़ मैदान है, जिसे बांगर भी कहते हैं।
❖ इस क्षेत्र में मारकण्डा, सरस्वती तथा चौटांग नदियाँ बहती हैं। समुद्र तल से इसकी ऊँचाई सामान्यतः 220–280 मी. के मध्य है।
❖ यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 68.2% क्षेत्र में फैला है।
❖ यह पानीपत, कैथल, करनाल, अंबाला, जींद, यमुनानगर, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, रोहतक, सिरसा, हिसार, गुड़गांव, फतेहाबाद तथा फरीदाबाद जिलों में विस्तृत है।
❖ इस मैदान का ढाल अत्यन्त मंद तथा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है।
4. बाढ़ के मैदान
❖ यमुना एवं उसकी सहायक नदियों से प्रदेश के पूर्वी भाग में बाढ़ के मैदान का निर्माण हुआ है।
❖ यह एक तरंगित मैदान है, जिसमें अन्तर्निहित घाटी मार्ग तथा दलदल पाए जाते हैं।
❖ मारकण्डा द्वारा निर्मित बाढ़ के मैदान को बेट तथा घग्घर द्वारा निर्मित बाढ़ के मैदान को नेली कहते हैं।
5. बालूमय मैदान
❖ यह बालूमय मैदान पश्चिम में हरियाणा व राजस्थान की सीमा के साथ-साथ विस्तृत है।
❖ राजस्थान से आने वाली गर्म शुष्क पवनों द्वारा लगातार कच्छ की ओर से लाई गई बालूमय मिट्टी के निक्षेप से इन बालू के टीलों का निर्माण हुआ है।
❖ यह मैदान सिरसा जिले के दक्षिणी भाग से प्रारंभ होकर भिवानी, रेवाड़ी, हिसार, महेंद्रगढ़ और झज्जर जिलों तक विस्तृत है। सामान्यतः बालू की टीलों की ऊँचाई 3–6 मीटर तक होती है लेकिन कहीं-कहीं ये 15 मीटर से भी अधिक ऊँची होती हैं।
❖ ये बालू के टीले पवन प्रवाह की दिशा में आगे खिसकते रहते हैं। इन टीलों के बीच में पाए जाने वाले निम्न स्थल को ताल कहते हैं। वहीं जिनमें वर्षा का जल भर जाता है अस्थायी झीलें निर्मित हो जाती हैं। इन्हें ‘टाल’ या ‘डूंग’ कहते हैं।
❖ इस क्षेत्र में हरित पट्टी लगाई गई है, जिससे बालू को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
6. अरावली का पथरीला प्रदेश
❖ यह प्रदेश अरावली पर्वतमाला की अवशिष्ट पहाड़ियों का विस्तार मात्र है, जो यहाँ के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसकी औसत ऊँचाई 220 से 500 मीटर तक है।
❖ इन क्षेत्रों में भिवानी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, फरीदाबाद और मेवात जिले सम्मिलित हैं। ये मैदान पूर्ण रूप से समतल न होकर ऊबड़-खाबड़ हैं जहाँ अरावली की अवशिष्ट शक्तियाँ पाई जाती हैं। ये सामान्यतः नीची, टूटी हुई और विखंडित रूप में विस्तृत हैं।
❖ हरियाणा के नांगल नगर के दक्षिण-पश्चिम में कुलताजपुर ग्राम (652 मी.) हरियाणा में अरावली प्रदेश का सबसे ऊँचा भाग है। इसे कोठी (ईसी) की पहाड़ियाँ कहते हैं।
❖ राज्य का एकमात्र प्रमुख जलविभाजक अरावली क्षेत्र में ही स्थित है।
❖ अरावली पर्वत श्रेणियां गुजरात से प्रारंभ होकर राजस्थान, हरियाणा से होकर दिल्ली में समाप्त होती हैं।
❖ इन पहाड़ियों की नग्न, कठोर और गोलाकार चट्टाने अर्ध-शुष्क रेतीले क्षेत्र में वायु अपरदन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
❖ इन पहाड़ियों से चूना तथा स्लेट का पत्थर निकाला जाता है। यहाँ वर्षा कम होती है, इसलिए यहाँ झाड़ियां तथा कांटेदार वृक्ष पाए जाते हैं। हरियाणा के मेवात जिले में अरावली की पहाड़ियां स्थित हैं।
7. तरंगित रेतीले मैदान
❖ यह कम विस्तृत तरंगित रेतीले मैदान हैं, जिसका निर्माण वायु की निक्षेप क्रिया द्वारा हुआ है।
❖ इसमें कहीं-कहीं टीलों के मध्य गर्त भी मिलते हैं, जिनमें वर्षा का जल भर जाता है।
❖ इस प्रकार का मैदान राज्य के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी तथा गुरुग्राम में फैला है।
❖ इस मैदान में अरावली पहाड़ियों के निकट बालू का जमाव होने के कारण ऐसा लगता है कि जैसे रेत रूपी समुद्र से पहाड़ियां बाहर की ओर निकली हुई हों।
8. अनकाई दलदल
❖ हरियाणा के पश्चिमी जिले सिरसा के दक्षिणी भाग में अनकाई दलदल पाया जाता है।
❖ यह 200 मीटर से कम ऊँचाई वाला क्षेत्र है। ‘सिरसा’ का बड़ा हिस्सा इसके अंतर्गत आता है।
❖ जलप्रवाह में अवरोध के कारण इस दलदल का प्रादुर्भाव हुआ है।
❖ नाट्यूरसी चौपटा (अनकाई दलदल) राज्य का सबसे कम ऊँचाई वाला क्षेत्र है।
भौगोलिक क्षेत्र
❖ भौगोलिक दृष्टि से हरियाणा को तीन इकाइयों में वर्गीकृत किया जाता है—
1. कुरुक्षेत्र
❖ यह क्षेत्र 28°30′ से 30° उत्तरी अक्षांश तथा 76°21′ से 77° पूर्वी देशान्तर के मध्य विस्तृत है। इसमें पूर्वी का करनाल जिला और जींद के क्षेत्र सम्मिलित हैं।
2. जाटियान
❖ 29°30′ से 30° उत्तरी अक्षांश के मध्य विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में हांसी, फतेहाबाद व हिसार तहसीलें, भिवानी और रोहतक जिले सम्मिलित हैं। जाटों की अधिकता के कारण इसे जाटियान क्षेत्र कहा जाता है।
3. भट्टियान
❖ यह क्षेत्र फतेहाबाद और भट्ठू कला के मध्य स्थित है।
❖ इस पर प्राचीन काल से भट्टी राजपूतों का आधिपत्य रहा है।
Important Links
| Geographical Introduction of Haryana (Mock Test) | Click Here |
| Haryana GK | Click Here |
| About Haryana (Wikipedia) | Click Here |
Geographical Introduction of Haryana क्या है?
Geographical Introduction of Haryana में राज्य की भौगोलिक स्थिति, स्थलाकृति, जलवायु, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों का अध्ययन किया जाता है। हरियाणा उत्तर भारत का एक landlocked राज्य है, जो लगभग 27°39′ से 30°35′ उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित है।
Geographical Introduction of Haryana के मुख्य भौगोलिक भाग कौन-कौन से हैं?
Geographical Introduction of Haryana के अंतर्गत चार प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र शामिल हैं—यमुना-घग्गर का मैदानी क्षेत्र, शिवालिक पहाड़ियाँ, अरावली पर्वतमाला और दक्षिण-पश्चिम का रेतीला क्षेत्र।
Geographical Introduction of Haryana में कौन-कौन सी नदियाँ महत्वपूर्ण हैं?
Geographical Introduction of Haryana के अनुसार यमुना राज्य की प्रमुख और स्थायी नदी है, जबकि घग्गर, मार्कंडा जैसी नदियाँ मौसमी हैं और राज्य की जल व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Geographical Introduction of Haryana के नोट्स कहाँ से पढ़ें?
आप Geographical Introduction of Haryana और Haryana GK से जुड़े विस्तृत नोट्स www.hrgk.in जैसी वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुसार structured PDF और सामग्री उपलब्ध होती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में Geographical Introduction of Haryana क्यों महत्वपूर्ण है?
Geographical Introduction of Haryana HSSC, CET, HPSC जैसी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें राज्य की स्थिति, जलवायु, नदियाँ और भौगोलिक विशेषताएँ शामिल होती हैं, जिनसे बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं।
