यदि आप हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) की तैयारी कर रहे हैं, तो “Haryana GK: Modern History of Haryana Notes PDF Download हरियाणा का आधुनिक इतिहास” एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। हरियाणा का आधुनिक इतिहास राज्य के गठन, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और सामाजिक-राजनीतिक विकास को समझने में सहायक है। इस विषय से जुड़े प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हरियाणा के आधुनिक इतिहास से संबंधित सरल, सटीक और विस्तृत नोट्स प्रदान करेंगे, जिससे आपकी तैयारी मजबूत होगी। साथ ही, आप इन नोट्स का PDF डाउनलोड करके त्वरित पुनरावृत्ति भी कर सकते हैं।
❖ मुगलों को अपदस्थ कर सितंबर, 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी ने दिल्ली में ब्रिटिश शासन को स्थापित किया।
❖ मुगल काल के अंतिम दिनों में जब मुगल शक्ति क्षीण हो गई, तब हरियाणा पर भी ब्रिटिश शासन मजबूत हुआ।
ईस्ट इंडिया कम्पनी का प्रशासन
❖ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी एक व्यापारिक कम्पनी के रूप में भारत आई थी किन्तु यहाँ की राजनीतिक अस्थिरता एवं अराजकता का लाभ उठाकर शीघ्र ही यह राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो गई।
❖ ईस्ट इंडिया कम्पनी ने 30 दिसंबर, 1803 को सुर्जीअंजन गाँव की संधि के अनुसार दौलतराव सिंधिया से उसके अधिकतर अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ हरियाणा प्रदेश भी प्राप्त कर लिया।
❖ फर्सखाबाद के नवाब तथा बल्लभगढ़ के राजा उमेद सिंह को उनकी पुरानी जागीरें दे दी गई।
❖ 1819 ई. में कम्पनी ने प्रशासनिक ढाँचे में संशोधन कर रेजीडेंट नामक अधिकारी को राजनीतिक शक्ति प्रदान की, साथ ही कम्पनी द्वारा अधिग्रहित भाग को तीन क्षेत्रों में विभाजित कर दिया।
(i) उत्तरी क्षेत्र- इस क्षेत्र में रोहतक, हिसार, पानीपत तथा सोनीपत रखे गए।
(ii) केन्द्रीय क्षेत्र- इस क्षेत्र में दिल्ली को रखा गया।
(iii) दक्षिणी क्षेत्र- इस क्षेत्र में खंडा, गुड़गांव, होडल, पलवल तथा मेवात रखे गए।
ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध विद्रोह
रानिया का विद्रोह
❖ 1810 ई. में हिसार जिले की रानिया रियासत के शासक जाबित खाँ ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार ली, किन्तु कम्पनी के आदेशों को अवहेलना करता था।
❖ परिणामस्वरूप कम्पनी ने 1818 ई. में रानिया के युद्ध में जाबित खाँ को परास्त कर इस रियासत को अपने अधिकार में ले लिया।
छछरोली की बगावत
❖ अंबाला क्षेत्र में 63 वर्ग किमी में विस्तृत इस छोटी रियासत का शासक बेंगेल सिंह था।
❖ 1809 ई. में उसकी मृत्यु उपरान्त कोई उत्तराधिकारी न होने के कारण कलसिया रियासत के राजा जोधसिंह ने उस पर अधिकार कर लिया।
❖ अंग्रेजी सेना के आने पर जोधसिंह पीछे हट गया तथा यह रियासत राम कौर को मिल गई।
❖ 1818 ई. में पुनः जोधसिंह ने छछरोली पर अधिकार कर लिया तथा राम कौर के खराब प्रशासन के कारण जनता ने भी रानी का साथ नहीं दिया।
❖ अंग्रेजों ने जोधसिंह के विरुद्ध सेना भेजकर छछरोली को अपने राज्य में मिला लिया।
रोहतक, गुड़गांव (गुरुग्राम) व हिसार में कृषक विद्रोह
❖ मालगुजारी वसूली के कठोर तरीकों के कारण हरियाणा के किसानों में व्यापक असंतोष था।
❖ 1824 ई. में बर्मा युद्ध में अंग्रेजों की हार की चर्चा सुनकर किसानों ने विद्रोह करना शुरू कर दिया।
❖ सरकारी खजानों तथा बैंकों में लूटमार शुरू हो गई। भिवानी के लोग सेना के वाहनों पर हमला करने लगे।
❖ सूरजमल ने विद्रोहियों को एकत्र कर लड़ाई शुरू कर दी, किन्तु प्रशिक्षित अंग्रेजी सेना ने किसानों को परास्त कर उन पर अत्याचार किए।
जींद विद्रोह
❖ 1813 ई. में जींद रियासत के शासक भगतसिंह को लकवा मारने पर उन्होंने अपने पुत्र प्रताप सिंह को कार्यकारी शासक नियुक्त किया, किन्तु अंग्रेजों ने रानी साहिबा को प्रशासक बना दिया।
❖ 23 जून, 1814 को प्रताप सिंह ने रानी को मारकर अपनी सरकार बना ली।
❖ अंग्रेजी सेना के आने पर प्रताप सिंह बलावली दुर्ग भाग गया, जो रणजीत सिंह के क्षेत्र में आता था।
❖ 1819 ई. में भगतसिंह की मृत्यु के बाद फतेह सिंह जींद का राजा बना तथा 1822 ई. में उसकी मृत्यु के बाद उसका 11 वर्षीय पुत्र संगत सिंह उत्तराधिकारी हुआ।
बनावली विद्रोह
❖ 1835 ई. में संगत सिंह की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने उसके सारे क्षेत्र पर अधिकार कर लिया।
❖ बनावली की जनता ने प्रताप सिंह के बहनोई गुलाब सिंह के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया।
❖ 1835 में अंग्रेजों से भीषण युद्ध में गुलाब सिंह मारा गया।
लाडवा विद्रोह
❖ लाडवा शासक अजीत सिंह अंग्रेजों का सख्त विरोधी था। अतः कोई आधार न मिलने के बावजूद अंग्रेजों ने 1845 ई. में उसे विद्रोही घोषित कर सहारनपुर जेल में डाल दिया।
❖ 1845-46 ई. में अजीत सिंह ने जेल से भागकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया तथा अंग्रेज सेनापति हेनरी स्मिथ को गिरफ्तार किया, किन्तु इसी दौरान उसकी मृत्यु हो गई और अंग्रेजों द्वारा उसकी रियासत को कम्पनी शासन में मिला लिया गया।
कैथल विद्रोह
❖ 1843 ई. में कैथल के शासक उदय सिंह की मृत्यु होने पर उसके निस्संतान होने के कारण नाभा रियासत के शासक गुलाब सिंह ने कैथल पर अपना अधिकार जताया, किन्तु अंग्रेज सरकार ने इसे नहीं माना।
❖ विलियम फ्रेजर की हत्या – विलियम फ्रेजर 1830 ई. में दिल्ली का रेजीडेंट बना। उसने लोहारू के नवाब शम्सुद्दीन की बहन से छेड़खानी कर दी, इस कारण नवाब ने दरोगा-ए-शिकार के माध्यम से अय्या नामक शिकारी द्वारा रेजीडेंट की हत्या करा दी।
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी द्वारा छीनी गई रियासतें
| रियासत का नाम | वर्ष | रियासत छीने का कारण |
|---|---|---|
| छछरोली | 1818 | रानी राम कौर की अक्षमता, जोध सिंह का हस्तक्षेप |
| रानिया | 1818 | नवाब जाबित खाँ द्वारा विद्रोह |
| अंबाला | 1824 | राजा गुरुदत्त सिंह की विधवा सरस्वती दया कौर की मृत्यु |
| शाहबाद | 1828 | राजा दयाल सिंह की विधवा सरस्वती इंदर कौर की मृत्यु |
| दियालगढ़ (दया कौर का हिस्सा) | 1829 | राजा भगवान सिंह की विधवा माई दया कौर की मृत्यु |
| शाहपुर (भगवान सिंह का 2/5 भाग) | 1832 | राजा ज्वालादत्त सिंह की बिना उत्तराधिकारी के मृत्यु |
| कैथल | 1843 | भाई उदय सिंह की बिना उत्तराधिकारी के मृत्यु |
| बुहोल | 1838 | राजा हरनाम सिंह की बिना उत्तराधिकारी के मृत्यु |
| चलौड़ी | 1844 | सरदार भगवान सिंह की विधवा सरस्वती राम कौर की मृत्यु |
| लाडवा | 1845 | राजा अजीत सिंह द्वारा विद्रोह |
| शाहसर (भगवानसिंह का 3/5 भाग) | 1850 | राजा फतेह सिंह की विधवा रानी चाँद कौर की मृत्यु |
| हलाल | 1850 | राजा फतेह सिंह की बिना उत्तराधिकारी के मृत्यु |
| दियालगढ़ (माई सुखन का एक हिस्सा) | 1851 | राजा भगवान सिंह की विधवा माई सुखन की मृत्यु |
1857 की क्रांति में भूमिका
❖ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी का सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में हस्तक्षेप तथा आर्थिक शोषण के परिणामस्वरूप देश के अन्य भागों की तरह हरियाणा में भी 1857 में क्रांति की लहर दौड़ी।
❖ हरियाणा में इस क्रांति का आरम्भ अंबाला से हुआ।
अंबाला
❖ 10 मई, 1857 को मेरठ में हुए सैन्य विद्रोह के बाद 13 मई, 1857 को अंबाला छावनी के सैनिकों ने भी क्रांति को शुरू करने की योजना बनाई थी।
❖ अंबाला की 5वीं बंगाली देशी पलटन ने विद्रोह किया। इस विद्रोह का नेतृत्व मोहन सिंह ने किया। विद्रोही सैनिकों ने नियंत्रण करने के लिए विलियम फोर्ड को मार दिया।
❖ विलियम फोर्ड ने भारतीय सैनिकों को रोककर समर्पण के लिए बाध्य कर दिया, किन्तु मेरठ के सैनिकों ने दिल्ली में अंग्रेजों पर आक्रमण करके देश में प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन की शुरुआत कर दी थी।
गुरुग्राम एवं मेवात
❖ 13 मई, 1857 को दिल्ली से 300 सैनिकों का एक दस्ता गुरुग्राम की ओर बढ़ा।
❖ अंग्रेज कलेक्टर विलियम फोर्ड ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, किन्तु असफल रहा। सैनिकों ने गुरुग्राम के सरकारी खजाने को लूट लिया।
❖ राव तुलाराम ने अपने भाई गोपाल देव के साथ अहीरों को संगठित करके अंग्रेजों से नारनौल नामक स्थान पर संघर्ष किया।
❖ इन सफलताओं से प्रभावित होकर फर्रुखनगर के अहमद अली और बल्लभगढ़ के अंतिम शासक नाहर सिंह भी क्रांति में शामिल हो गए, किन्तु उन पर अंग्रेजों के साथ संबंध रखने के आरोप भी लगते रहे।
❖ जून, 1857 में जयपुर राज्य के अंग्रेज रेजीडेंट मेजर एडन ने एक बड़ी सैनिक टुकड़ी और तोपखानों के साथ क्रांतिकारियों के विद्रोह को कुचलने का प्रयास किया।
❖ हरियाणा से रोहतक और तावडू के बीच कई संघर्ष हुए। अतः मेजर एडन को असफल होकर वापस जाना पड़ा।
रोहतक
❖ रोहतक में मई, 1857 के अंत में क्रांति का आरम्भ हुआ। रोहतक पर अंग्रेजों का नियंत्रण लगभग समाप्त हो गया।
❖ अंग्रेजों ने अंबाला से एक सेना रोहतक पर नियंत्रण करने के लिए भेजी, किन्तु इस सेना ने भी विद्रोह कर दिया।
❖ अगस्त, 1857 में अंग्रेज लेफ्टिनेंट (बाद में मेजर) हडसन के नेतृत्व में एक सैन्य टुकड़ी ने रोहतक के निकट खेड़ी (हिसार एवं रोहतक सीमा) में डेरा जमाया किया और यहाँ पर अंग्रेजों ने विजय प्राप्त की। जींद के राजा ने हडसन का साथ दिया।
❖ हडसन ने रोहतक पर अधिकार कर जींद में मिला दिया।
हिसार एवं सिरसा
❖ मई, 1857 में शहजादा मोहम्मद आजम के नेतृत्व में हिसार में भी विद्रोह की शुरुआत हुई और हरियाणा लाइट इन्फेंट्री की सैन्य टुकड़ियों ने हिसार व सिरसा में स्थित अपने शिविरों में विद्रोह कर दिया।
❖ फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर जनरल वार्न कोल्डवेल के नेतृत्व में अंग्रेज सेना ने क्रांतिकारियों से मुकाबला किया।
❖ जून, 1857 में उगाना ग्राम में नवाब नूर मोहम्मद खान के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से संघर्ष किया। इस संघर्ष में अंग्रेज सेना विजयी रही।
❖ इसके बाद अंग्रेज सेना ने खरखौदा नामक ग्राम व उसके आसपास के लोगों पर अत्याचार किए। इस ग्राम के लोगों ने एक अंग्रेज अधिकारी हिलार्ड को मार दिया।
❖ अंग्रेजों ने खिदरका नामक ग्राम में भी निर्दयतापूर्वक लोगों को मारा व ग्राम में आग लगा दी।
1857 ई. की महान क्रांति के प्रमुख नेता
| क्र.सं. | क्षेत्र | स्थान | प्रमुख नेता |
|---|---|---|---|
| 1. | दिल्ली | दिल्ली | बहादुरशाह (मुख्य नेता) |
| सोनीपत | — | ||
| 2. | गुरुग्राम | गुरुग्राम | — |
| मेवात | सदरुद्दीन (किसान) | ||
| अहीरवाल | तुलाराम (मुख्य सरदार) | ||
| पलवल | गफूर अली (व्यापारी), हरसुख राय (किसान) |
| फरीदाबाद | धानु सिंह (किसान) | ||
| बल्लभगढ़ | नाहर सिंह (मुख्य सामंत) | ||
| फर्रुखनगर | अहमद अली (मुख्य सामंत), गुलाम मोहम्मद (सरकारी कर्मचारी) | ||
| पटौदी | अकबर अली (मुख्य सामंत) | ||
| 3. | पानीपत | पानीपत | इमाम अली कलंदर (मौलवी) |
| करनाल | — | ||
| जगाधरी | — | ||
| 4. | थानेसर | थानेसर | — |
| लाडवा | — | ||
| 5. | रोहतक | खरखौदा | विसारत अली (किसान, भूतपूर्व रिसालदार) |
| सांपला | सागर खाँ (किसान) | ||
| दुजाना | हसन अली (मुख्य सामंत) | ||
| दादरी | बहादुर जंग (मुख्य सामंत) | ||
| झज्जर | अब्दुर्रहमान (मुख्य सामंत), अब्दुस्समद (झज्जर नवाब का जनरल) | ||
| 6. | हिसार | भट्टू | मोहम्मद आजम (सरकारी कर्मचारी) |
| हांसी | हुक्म चंद (सरकारी कर्मचारी) | ||
| रानियां | नूर मोहम्मद खाँ (मुख्य सामंत) | ||
| लोहारू | अमीनुद्दीन (मुख्य सामंत) | ||
| 7. | अंबाला | अंबाला | — |
| रोपड़ | मोहन सिंह (नेता) | ||
| जगाधरी | — |
थानेसर
❖ पानीपत और कुरुक्षेत्र के निकट थानेसर में भी 1857 की क्रांति का प्रभाव रहा।
❖ पंजाब व उत्तरी भारत को दिल्ली से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग जीटी रोड इन्हीं क्षेत्रों से गुजरता था। अतः अंग्रेज इस क्षेत्र पर अधिकार बनाए रखना चाहते थे। अंग्रेजों ने अपने सहयोगी पटियाला, कैथल, जींद व करनाल के स्थानीय शासकों की सहायता से इस क्षेत्र में क्रांति को दबाना चाहा, किन्तु प्रारम्भ में अंग्रेजों की पराजय हुई।
हरियाणा में राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन
❖ 1885 ई. में अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस की स्थापना होने के बाद 1886 ई. में राय बहादुर लाला मुलराज के प्रयासों से अंबाला में कांग्रेस की एक शाखा बनाई गई।
❖ अक्टूबर, 1886 में रोहतक में रईसाज खाँ की अध्यक्षता में कांग्रेस की एक सार्वजनिक सभा हुई।
❖ 1886 ई. में कलकत्ता में हुए दूसरे कांग्रेस अधिवेशन में हरियाणा का प्रतिनिधित्व पंडित दीनदयाल शर्मा, लाला मुरलीधर व बालमुकुंद गुप्त ने किया।
❖ लाला लाजपत राय, राय बहादुर मुरलीधर के अतिरिक्त दीनदयाल शर्मा, बालमुकुंद गुप्त, छोटेलाल, श्यामलाल, गोरीशंकर, दुलेचन्द आदि हरियाणावासियों ने कांग्रेस के विभिन्न अधिवेशनों में भाग लिया।
लाला लाजपत राय का प्रभाव
❖ लाला लाजपत राय 1884 ई. में अपने पिता के साथ रोहतक आए, यहाँ उनके पिता शिक्षक थे।
❖ 1888 ई. में इलाहाबाद (प्रयागराज) में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में लाला लाजपत राय ने हिसार कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में प्रथम बार भाग लिया।
❖ इन्होंने बाबू चूड़ामणि और गोरीशंकर के साथ बम्बई में 1889 ई. के कांग्रेस अधिवेशन में भी भाग लिया।
❖ लाला लाजपत राय को आर्य समाज हिसार (1889 ई.) के संस्थापक के रूप में भी याद किया जाता है।
❖ मई, 1907 में पंजाब के उप-राज्यपाल तथा अजीत सिंह डेनियल इवेटसन ने लॉर्ड मिंटो के निर्देश पर लाला लाजपत राय को देश निकाला देकर बर्मा की मांडले जेल भेज दिया। भारी जन दबाव के चलते नवंबर, 1907 में उन्हें जेल से छोड़ना पड़ा।
मॉर्ले-मिंटो सुधार (1909)
❖ हरियाणा में क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र अंबाला बना, जहाँ दिसंबर, 1909 में बमों के अवैध निर्माण के मामले पकड़े गए।
❖ हरियाणा के प्रसिद्ध हिंदी लेखक बालमुकुंद गुप्त ने ‘शिवशम्भु का चिट्ठा’ नामक लेखों के माध्यम से खुला विरोध किया।
❖ वर्ष 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधार के अधीन गुरुग्राम (गुड़गांव), रोहतक व हिसार के जिला बोर्ड व कमेटियों की वोट से पंजाब विधान परिषद के लिए एक सदस्य चुने जाने की अनुमति दे दी गई।
❖ अंबाला व करनाल जिलों को शिमला के साथ जोड़कर विधान परिषद सदस्यता निर्धारित की गई।
❖ वर्ष 1916 में होम्सल लीग आंदोलन की शुरुआत हुई। बालगंगाधर तिलक तथा एनी बेसेंट ने होम्सल लीग का गठन किया।
❖ हरियाणा में पंडित नेकीराम शर्मा ने होम्सल लीग आंदोलन को विस्तार प्रदान किया।
प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हरियाणा
प्रथम विश्व युद्ध
❖ हरियाणा प्रथम विश्व युद्ध (1914–18) के समय मुख्य भर्ती क्षेत्रों में से एक था, इसलिए इसका विशिष्ट स्थान था।
❖ पंजाब क्षेत्र से युद्ध के दौरान वीर सेना प्रदान करने के कारण सरकार ने उपहारस्वरूप शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को नई विधानपरिषदों में दोनों क्षेत्रों की जनसंख्या के आधार पर पृथक प्रतिनिधित्व प्रदान किया।
❖ इसका विरोध रोहतक के रायबहादुर चौधरी लालचन्द ने किया। अतः सरफरोश हुसेन, लाला हरकिशन लाल व चौधरी लालचन्द के मध्य राजनीति चलती रही।
❖ हरियाणा में पं. नेकीराम शर्मा ने प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत में अंग्रेजों द्वारा सैनिक भर्ती अभियान का विरोध किया था।
द्वितीय विश्व युद्ध
❖ द्वितीय विश्व युद्ध (1939–45) के प्रारम्भ होने से अचानक परिस्थितियाँ बदल गई, क्योंकि जापान ने इंग्लैंड का पक्ष लिया।
❖ ब्रिटिश सरकार द्वारा देश को युद्ध का भागीदार बनाने के सम्बन्ध में कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया।
❖ यूनियनिस्ट मंत्रालय का नाम बदलकर मुस्लिम लीग रखने के मुद्दे पर सर छोटूराम व जिन्ना के मध्य सीधा संघर्ष हुआ।
रॉलेट एक्ट व सत्याग्रह आन्दोलन
❖ रॉलेट एक्ट के विरोध में 30 मार्च, 1919 से 19 अप्रैल, 1919 के मध्य व्यापक स्तर पर सत्याग्रह आन्दोलन चलाया गया।
❖ हरियाणा के नेताओं के आमंत्रण पर इस आन्दोलन को प्रेरित करने हेतु महात्मा गाँधी बम्बई से हरियाणा आए।
❖ 6 अप्रैल, 1919 को रॉलेट एक्ट के विरोध में रोहतक में एक बड़ी कांफ्रेंस आयोजित की गई।
❖ 10 अप्रैल, 1919 को जब गाँधीजी पलवल पहुँचे, तो सरकार ने उन्हें बन्दी बनाकर बम्बई जाने वाली गाड़ी में बैठा दिया।
❖ 14 अप्रैल को रेल कर्मचारियों व जनता ने बहादुरगढ़ स्टेशन पर हमला किया।
❖ 15 अप्रैल, 1919 को रोहतक शहर में ‘क्रांतिकारियों का संदेश’ नामक शीर्षक के पोस्टर लगाए गए।
❖ 19 अप्रैल को क्रांतिकारियों ने अंबाला छावनी में 1/34 सिख पायनियर रेजीमेंट के स्टोर में आग लगा दी। इस प्रकार प्रत्येक स्थान पर तोड़-फोड़ होती रही।
❖ 30 जुलाई, 1919 को गाँधीजी को हिसार में गिरफ्तार किया गया।
असहयोग आन्दोलन (1920–22)
❖ हरियाणा के करनाल जिले के पानीपत शहर में अक्टूबर, 1920 में असहयोग आन्दोलन सम्बन्धी प्रथम सभा का आयोजन लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हुआ।
❖ पानीपत में सम्पन्न इस सभा के उपरान्त समिति का गठन हुआ, प्रमुख मौलाना तफज्जुल्ला खान को बनाया गया था, जो खिलाफत आन्दोलन के नेता थे।
❖ अक्टूबर, 1920 में ही भिवानी में एक बड़ी सभा का आयोजन लाला मुरलीधर की अध्यक्षता में किया गया।
❖ इस आन्दोलन के चलते हरियाणा के बहुत-से लोगों ने सरकार से प्राप्त पदकों व सम्मानों को लौटा दिया। अंबाला के लाला मुरलीधर व रायबहादुर शमशेर सिंह के अतिरिक्त वकीलों द्वारा सरकारी न्यायालयों का बहिष्कार किया गया व ग्राम पंचायतों का निर्माण किया गया।
❖ स्वदेशी आन्दोलन के प्रचार-प्रसार के लिए पं. मदन मोहन मालवीय व मोहम्मद अली अक्टूबर, 1921 में रोहतक आए।
❖ गाँधीजी ने रोहतक में राष्ट्रीय शिक्षा देने के लिए तथा विदेशी शिक्षा के बहिष्कार हेतु वैश्य उच्च विद्यालय की नींव रखी।
साइमन कमीशन का विरोध (1928)
❖ हरियाणा के भिवानी, रोहतक, झज्जर व अंबाला आदि जिलों में साइमन कमीशन का कड़ा विरोध किया गया।
❖ लाहौर में विरोध के फलस्वरूप लाला लाजपत राय को चोट लगी और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
❖ इसमें पंजाब-हरियाणा में अधिक आक्रोश रहा। डॉ. सत्यपाल, राम शर्मा व नेकीराम शर्मा आदि ने जनता को प्रोत्साहित किया।
❖ 10 मार्च, 1929 को रोहतक में कृषक मजदूर सम्मेलन का आयोजन अर्जुन सेठी ने किया। इसमें जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे।
हरियाणा—महत्वपूर्ण घटनाक्रम/तिथियाँ
| तिथि | घटनाक्रम |
|---|---|
| 324–232 ई.पू. | हरियाणा पर मौर्यों का अधिकार |
| 580 ई. | पुष्यभूति नरेश प्रभाकरवर्धन राजा बने |
| 805 ई. | प्रतिहार नरेश नागभट्ट द्वितीय का हरियाणा पर कब्जा |
| 1191 ई. | तराइन में पृथ्वीराज चौहान ने हमला कर मोहम्मद गौरी को हराया |
| 24 जून, 1206 | कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली व हरियाणा का प्रथम मुस्लिम शासक बना |
| 1266–87 ई. | हरियाणा पर बलबन का अधिकार |
| 1398 ई. | तैमूर ने हरियाणा पर आक्रमण किया |
| 21 अप्रैल, 1526 | पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराया |
| 30 सितम्बर, 1830 | हरियाणा पर अंग्रेजों ने अधिकार किया और सुर्जींजन गाँव की संधि हुई |
| 1833 ई. | हरियाणा को उत्तर-पश्चिमी प्रान्त का हिस्सा बनाया गया |
| 1886 ई. | अंबाला में कांग्रेस की पहली शाखा शुरू |
| 1892 ई. | लाला लाजपत राय का हिसार से लाहौर प्रस्थान |
| 1947 ई. | देश आजाद हुआ तथा हरियाणा, पंजाब का हिस्सा बना |
| 1949 ई. | सच्चर फार्मूला लागू हुआ |
| 1 नवम्बर, 1966 | आधुनिक हरियाणा राज्य का निर्माण, चण्डीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश बना, भगवत दयाल शर्मा पहले मुख्यमंत्री बने |
सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930)
❖ गाँधीजी की दांडी यात्रा (1930) के बाद नमक कानून का विरोध करने पर हरियाणावासियों ने भी गाँधीजी के समर्थन में प्रतिकात्मक नमक बनाया।
❖ अंबाला में लाला दुनीचन्द की पुत्रियों—विद्यावती देवी, यशोदा देवी व यमुना देवी के नेतृत्व में कई महिलाओं ने इस आन्दोलन में भाग लिया। किसानों ने कर न देने का आन्दोलन चलाया।
❖ 12–13 अप्रैल, 1930 को झज्जर में सूरजभान की अध्यक्षता में जिला राजनीतिक कांग्रेस का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों किसानों ने हिस्सा लिया।
भारत छोड़ो आन्दोलन
❖ 8 अगस्त, 1942 में इस आन्दोलन की घोषणा के साथ ही हरियाणा में रेलवे स्टेशनों, डाकघर, तारघर और पुलिस थानों पर तोड़-फोड़ व प्रदर्शन किए गए।
❖ बड़े नेताओं की गिरफ्तारी हो जाने से जनता ने स्वयं ही आन्दोलन संचालित किया।
आजाद हिन्द फौज
❖ सुभाष चन्द्र बोस द्वारा गठित ‘आजाद हिन्द फौज’ में हरियाणा के 2715 युवकों ने अपना योगदान दिया।
❖ बर्मा (म्यांमार) तथा असम के जंगलों में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए हरियाणा के 346 अफसरों सहित सिपाहियों ने आजाद हिन्द फौज की वर्दी में श्रेष्ठ कुर्बानियाँ दीं।
1946 का चुनाव
❖ वर्ष 1946 के चुनाव से पूर्व ही पंजाब और हरियाणा की यूनियनिस्ट पार्टी कमजोर हो गई थी।
❖ परिणामस्वरूप इस वर्ष हुए चुनाव में मुस्लिम लीग को 75, कांग्रेस को 51, अकाली दल को 22 तथा यूनियनिस्ट पार्टी को मात्र 20 सीटें मिलीं। निर्दलीय उम्मीदवार 7 स्थानों पर विजयी हुए।
❖ कांग्रेस ने यूनियनिस्ट पार्टी के सहयोग से सरकार बनाई। इस सरकार में हरियाणा के कांग्रेसी नेता चौधरी लहरी सिंह शामिल थे।
स्वतंत्रता की प्राप्ति (1947)
❖ पंजाब का पश्चिमी भाग मुस्लिम बहुल तथा पूर्वी भाग व हरियाणा हिन्दू बहुल था और यहाँ साम्प्रदायिक तनाव चरम पर था।
❖ यहाँ अनेक साम्प्रदायिक दंगे हुए। इन्हीं परिस्थितियों में 14 अगस्त, 1947 को भारत का विभाजन हुआ और भारत तथा पाकिस्तान नए स्वरूप में आए।
❖ 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ तथा हरियाणा पंजाब का भाग बना रहा।
स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी
नाहरसिंह
❖ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के हरियाणवी योद्धाओं में नाहरसिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इन्हें ‘बल्लभगढ़ का शेर’ कहा जाता था।
❖ वे 1829 ई. में बल्लभगढ़ रियासत के शासक बने। वे अंग्रेजों के कट्टर विरोधी थे।
❖ इन्होंने दिल्ली सम्राट बहादुरशाह जफर से मित्रता की और अपने सैनिक भेज कर सम्राट को दिल्ली की गद्दी अंग्रेजों से मुक्त कराकर पुनः पाने में सहायता की।
❖ 20 सितम्बर, 1857 को अंग्रेजों ने दिल्ली पर पुनः कब्जा कर लिया।
❖ 9 जनवरी, 1858 को राजद्रोह का मुकदमा चलाकर नाहरसिंह को दिल्ली में फांसी की सजा दी गई।
❖ इन्होंने रॉलेट एक्ट के विरोध में वर्ष 1921 में अपनी सभी उपाधियाँ लौटा दी। ये ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ पंजाब’ के नाम से भी प्रसिद्ध थे। वर्ष 1922 में इनका निधन हो गया।
चौधरी कुपाराम
❖ इनका जन्म हिसार के स्याहदवा में हुआ था। इन्होंने गाँधीजी के आह्वान पर नौकरी छोड़ दी तथा हिसार में गाँधीजी के प्रचारक बन गए।
❖ वर्ष 1941 में ये हिसार कांग्रेस के अध्यक्ष बने। भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सेदारी के कारण इन्हें छः माह के कारावास की सजा हुई।
पंडित श्रीराम शर्मा
❖ इनका जन्म 1 अक्टूबर, 1899 को झज्जर में हुआ था। कांग्रेस के सभी पाँच सत्याग्रहों (1922, 30, 32, 41 तथा 1942) में भाग लेने के कारण ये सात वर्षों तक कारावास में रहे।
❖ इन्होंने वर्ष 1923 में रोहतक से आजादी के समर्थन में उर्दू और हिन्दी में ‘हरियाणा तिलक’ नामक साप्ताहिक पत्र निकाला और ‘हरियाणा का इतिहास’ तथा ‘हरियाणा के नवरत्न’ का लेखन कार्य किया।
❖ 17 अक्टूबर, 1989 को ये पंचतत्व में विलीन हो गए।
लाला श्याम लाल
❖ वर्ष 1916 में ये रोहतक कांग्रेस कमेटी के मंत्री बने तथा वर्ष 1917 में प्रतिनिधि के रूप में इन्होंने कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में भाग लिया।
❖ इन्होंने वर्ष 1921 में वकालत छोड़ दी।
❖ वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह में भाग लेने के कारण इन्हें 2 वर्ष की जेल हुई।
❖ लाहौर षड्यंत्र केस में ये क्रांतिकारियों के वकील बने तथा वर्ष 1934 में केन्द्रीय असेम्बली में कांग्रेस के सदस्य बने। 10 जनवरी, 1940 को ये स्वर्गवासी हो गए।
लाला दौलतराम गुप्ता
❖ इनका जन्म रोहतक में हुआ था। ये वर्ष 1916 में रोहतक कांग्रेस कमेटी के सहकारी मंत्री बने।
❖ असहयोग आन्दोलन और नमक सत्याग्रह में भाग लेने के कारण इन्हें 6–6 महीने का कारावास हुआ। ये वर्ष 1932 से हरिजन सेवक संघ के कार्य में संलग्न हो गए।
राधाकृष्ण वर्मा
❖ इन्होंने वर्ष 1920 में भिवानी में ‘नौजवान भारत सभा’ की स्थापना की।
❖ वर्ष 1930 में यह संस्था अवैध घोषित कर दी गई, जिस कारण इन्हें छः माह की सजा हुई।
❖ भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लेने के कारण ये 26 जनवरी, 1943 को गिरफ्तार हुए तथा चार माह के लिए जेल गए। ये वर्ष 1955 से 1957 तक भिवानी कांग्रेस के प्रधान रहे।
बलदेव सिंह
❖ इनका जन्म हुमायूँपुर ग्राम में हुआ था। इन्होंने रोहतक में जाट हाई स्कूल की स्थापना की।
❖ असहयोग आन्दोलन के दौरान इन्हें एक वर्ष की सजा दी गई। असहयोग आन्दोलन के दौरान इन्होंने राष्ट्रीय विद्यालय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये वर्ष 1926 के चुनाव में पंजाब काउंसिल के सदस्य चुने गए।
लाला काकराम
❖ इन्होंने वर्ष 1919 में रॉलेट एक्ट के विरुद्ध हड़ताल का आयोजन करवाया था।
❖ नमक सत्याग्रह में भागीदारी के कारण इन्हें एक वर्ष की सजा दी गई। वर्ष 1932 में कैथल मंडी से गिरफ्तार कर इन्हें छह माह की सजा दी गई।
❖ वर्ष 1940 में मोतीलाल नेहरू के जन्मदिवस पर सार्वजनिक भाषण देने के कारण भी इन्हें गिरफ्तार किया गया। भारत विभाजन के बाद ये शरणार्थियों की सेवा में संलग्न हो गए।
बाबू दयाल शर्मा
❖ इनका जन्म खेड़ी की मालपुरा तहसील में हुआ था। मैट्रिक के बाद इन्होंने सहकारिता विभाग में नौकरी की।
❖ ये वर्ष 1932 में कांग्रेस में शामिल हो गए तथा इन्होंने पटौदी रियासत में प्रजामंडल आन्दोलन का नेतृत्व किया।
❖ वर्ष 1946 में इन्होंने पटौदी रियासत के नवाब से टक्कर ली। वर्ष 1952 में कांग्रेस की ओर से ये पंजाब विधानसभा के सदस्य बने।
पंडित अमीलाल
❖ इनका जन्म जींद के मांडाखेड़ी ग्राम में हुआ था। इन्होंने वर्ष 1929 में गाँधीजी के निवास स्थान पर 10 दिन स्वयंसेवक के रूप में कार्य किया।
❖ इन्हें सविनय अवज्ञा के दौरान बवाना ग्राम (दिल्ली) से गिरफ्तार कर छह माह की जेल की सजा दी गई।
❖ वर्ष 1935 में इन्होंने प्रजामंडल जींद में काम किया तथा दो माह जेल में रहे। आर्य समाज सत्याग्रह में इन्हें नौ माह के कारावास की सजा दी गई।
भरत सिंह
❖ मोहड़ा (मेहम) निवासी भरत सिंह सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान नौ महीने जेल में रहे।
❖ वर्ष 1941 में इन्हें व्यक्तिगत रूप से सत्याग्रह में भाग लेने के कारण छह माह की सजा हुई।
❖ इन्होंने जिला कांग्रेस में मंत्री तथा प्रभारी के पद पर भी कार्य किया।
❖ वर्ष 1957 में मेहम से ये (कांग्रेस के विरोध में) विधानसभा के सदस्य बने।
बद्लूराम
❖ इनका जन्म रोहतक के सांधी ग्राम में हुआ था। नमक सत्याग्रह के दौरान इन्हें छह माह जेल की सजा दी गई। सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान इन्होंने 2–3 बार जेल की यात्रा की।
❖ वर्ष 1946 के चुनाव में ये रोहतक के मेहम क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से विधानसभा के सदस्य बने। वर्ष 1952 में भी इन्हें विधानसभा का सदस्य चुना गया।
भगवत दयाल शर्मा
❖ इनका जन्म बेरी में हुआ था। वर्ष 1941–42 के आन्दोलन में इन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई तथा तीन बार जेल गए।
❖ वर्ष 1942 की क्रांति में भूमिगत रहकर इन्होंने आन्दोलन में भाग लिया।
❖ 1 नवम्बर, 1966 को पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद हरियाणा राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बने।
चौधरी देवी लाल
❖ इनका जन्म सिरसा जिले के चौटाला गाँव में हुआ था। वर्ष 1930 में अपनी शिक्षा अधूरी छोड़कर ये स्वयंसेवक बन गए।
❖ वर्ष 1942 के आन्दोलन में इनकी भूमिका सक्रिय रही तथा इन्हें कारावास की सजा मिली।
❖ वर्ष 1952 में ये पंजाब में कांग्रेस के सदस्य बने तथा वर्ष 1962 के चुनाव में कांग्रेस के विरुद्ध चुने गए और विपक्षी दल के नेता बने।
❖ हरियाणा राज्य के गठन में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
❖ वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने तथा वर्ष 1989 में केन्द्र सरकार में उप-प्रधानमंत्री बने। 6 अप्रैल, 2001 को इनका निधन हो गया।
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Modern History of Haryana क्या है और इसमें कौन-कौन से काल शामिल हैं?
Modern History of Haryana मुख्य रूप से ब्रिटिश शासन काल, स्वतंत्रता संग्राम और राज्य के गठन (1966) तक की घटनाओं को कवर करता है। इस अवधि में 1857 की क्रांति, सामाजिक सुधार आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
Modern History of Haryana में 1857 की क्रांति का क्या महत्व है?
Modern History of Haryana में 1857 की क्रांति एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जिसमें अंबाला, हिसार, रोहतक और रेवाड़ी जैसे क्षेत्रों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस विद्रोह के बाद हरियाणा को पंजाब में मिला दिया गया था।
Haryana के गठन का Modern History of Haryana में क्या महत्व है?
Modern History of Haryana का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 1 नवंबर 1966 है, जब भाषाई आधार पर पंजाब से अलग होकर हरियाणा राज्य का गठन हुआ। यह घटना हरियाणा की पहचान और प्रशासनिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Modern History of Haryana के नोट्स कहाँ से पढ़ें या डाउनलोड करें?
आप Modern History of Haryana और Haryana GK से जुड़े विस्तृत नोट्स और PDF www.hrgk.in जैसी वेबसाइट से आसानी से पढ़ और डाउनलोड कर सकते हैं, जहाँ परीक्षा के अनुसार structured content उपलब्ध होता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए Modern History of Haryana क्यों जरूरी है?
Modern History of Haryana HSSC, CET, HPSC जैसी परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें स्वतंत्रता संग्राम, प्रमुख नेता, और राज्य निर्माण से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। यह Haryana GK का एक core हिस्सा है।
