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Haryana GK: Haryana Forest Wealth Notes PDF Download हरियाणा का वन सम्पदा

By Ravi Yadav

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यदि आप हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) की तैयारी कर रहे हैं, तो “Haryana GK: Haryana Forest Wealth Notes PDF Download हरियाणा का वन सम्पदा” एक महत्वपूर्ण विषय है। हरियाणा की वन सम्पदा राज्य के पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां के वन क्षेत्र, प्रमुख वृक्ष प्रजातियां और वन्य जीवन राज्य की पारिस्थितिकी को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हरियाणा की वन सम्पदा से संबंधित सरल और विस्तृत नोट्स प्रदान करेंगे, जिससे आपकी परीक्षा की तैयारी बेहतर होगी। साथ ही, आप इन नोट्स का PDF डाउनलोड करके आसानी से त्वरित पुनरावृत्ति भी कर सकते हैं।

❖ वन संसाधन की दृष्टि से हरियाणा राज्य समृद्ध नहीं है। वर्ष 1966 में अपने गठन के समय हरियाणा में पास 3.9% वन क्षेत्र था, जबकि अब यह लगभग 6.85% है।
❖ राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार, प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 20% भाग पर वन होने चाहिए।
❖ हरियाणा में वनों को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा-38 के अन्तर्गत वन क्षेत्र और पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-4 एवं 5 के अन्तर्गत वन क्षेत्रों (आरक्षित वन, संरक्षित वन और अवर्गीकृत वन) में बांटा गया है।
❖ राज्य में सरकण्डा (Cane) का अधिकता पाई जाती है, जिसका उपयोग रस्सी बनाने में किया जाता है।
❖ राज्य में मधुमक्खी का कुटीर उद्योग भी इसी पर आधारित पाया जाता है।
❖ राज्य की वन सम्पदा का पर्यावरण के साथ आर्थिक महत्व भी है, इसलिए सरकार द्वारा इसके संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण उपाय भी किए गए हैं।

वनों का वर्गीकरण

❖ वनों के आर्थिक महत्व के आधार पर हरियाणा शासन ने वनों का राष्ट्रीयकरण कर दिया है।
❖ राज्य के वनों का विभिन्न आधार पर वर्गीकरण किया गया है, जो इस प्रकार है—

  1. प्राकृतिक वर्गीकरण
  2. प्रशासनिक वर्गीकरण।

वनों का प्राकृतिक वर्गीकरण

❖ चैम्पियन एवं सेठ के अनुसार हरियाणा में भौगोलिक आधार पर पाँच प्रकार के वन पाए जाते हैं, जिन्हें मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है— (i) उष्णकटिबन्धीय शुष्क पतझड़ वन, (ii) उष्ण कटिबन्धीय पाइन वन।

(i) उष्णकटिबन्धीय शुष्क पतझड़ वन

❖ 20–40 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में इस प्रकार के वन पाए जाते हैं। ये वन आर्द्र क्षेत्रों में आर्द्र पर्णपाती तथा शुष्क क्षेत्रों में कंटीले पाए जाते हैं।
❖ इस वन का विस्तार महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी, गुड़गांव, भिवानी, कैथल, करनाल तथा जीन्द आदि जिलों के मैदानी क्षेत्रों में पाया जाता है।
❖ इस वन में सामान्य रूप से शीशम, पीपल, नीम, आम, जामुन, इमली, बड़, रेड, लहसुआ, सेमल आदि वृक्ष पाए जाते हैं।
❖ शुष्क भागों में पीले नीम, ढाक, झारबेरी, गिरार, कीकर आदि के वृक्ष पाए जाते हैं।
❖ इसके अलावा यहां ढोंक, खैर, आक, बेर, खजूर, बड़, पाला, संजना, सरकण्डा आदि भी पाए जाते हैं।

(ii) उपोष्ण कटिबन्धीय पाइन वन

❖ यह वन प्रदेश मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ वर्षा 100 सेमी या उससे अधिक होती है।
❖ इस वन क्षेत्र का विस्तार प्रदेश के अंबाला, पंचकुला, यमुनानगर और रोहतक जिलों तथा हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाया जाता है। साल के वृक्ष रोहतक के वन में पाए जाते हैं।
❖ इस वन क्षेत्र में चीड़ एवं पाइन के अतिरिक्त सिरस, जामुन, कचनार, खैर, जिंगन, अमलतास, महुआ, कालका, बहेड़ा आदि के वृक्ष भी पाए जाते हैं।

वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण

❖ भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा-38 तथा पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-4 व 5 के अन्तर्गत वन क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत हैं। राज्य में वनों को प्रशासनिक वर्गीकरण के अन्तर्गत तीन वर्गों में विभाजित किया गया है— (i) आरक्षित वन क्षेत्र, (ii) संरक्षित वन क्षेत्र तथा (iii) अवर्गीकृत वन क्षेत्र।

(i) आरक्षित वन

❖ इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट, 2021 के अनुसार, राज्य में आरक्षित वन (Protected Forest) 249 वर्ग किमी में फैला है, जो राज्य के कुल वन क्षेत्रफल का 15.97% है।
❖ भूमि कटाव, बाढ़ को रोकथाम, जलवायु एवं लकड़ी आपूर्ति की दृष्टि से इन्हें सुरक्षित वनों की श्रेणी में रखा गया है।
❖ इन वनों में लकड़ी काटना एवं पशुचारण निषिद्ध है, क्योंकि यह सरकारी सम्पत्ति मानी जाती है। इन वनों में से अनेक मूल्यवान वनौषधि प्राप्त किए जाते हैं।
❖ सर्वाधिक आरक्षित वन क्षेत्र वाले राज्य के 5 जिले घटते क्रम में क्रमशः: पंचकुला, यमुनानगर, कैथल, कुरुक्षेत्र तथा महेन्द्रगढ़ हैं।
❖ राज्य के न्यूनतम आरक्षित वन क्षेत्र वाले जिले क्रमशः: सिरसा, नूंह, भिवानी, पलवल तथा फरीदाबाद हैं।

(ii) संरक्षित वन

❖ इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021 के अनुसार, संरक्षित वन (Reserved Forest) क्षेत्र 1,158 वर्ग किमी में फैला है, जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का 74.28% है।
❖ इन वनों में संरक्षण के साथ उत्पादन हेतु गतिविधियाँ भी चलाई जाती हैं।
❖ यद्यपि लकड़ी काटना तथा पशुचारण भी किया जाता है, किन्तु वनों की हानि न हो इसके लिए पर्याप्त देख-रेख की जाती है।
❖ राज्य के सर्वाधिक संरक्षित वन क्षेत्र वाले 5 जिले क्रमशः: पंचकुला, यमुनानगर, भिवानी, सोनीपत तथा करनाल हैं।
❖ राज्य के न्यूनतम संरक्षित वन क्षेत्र वाले 5 जिले क्रमशः: फरीदाबाद, नूंह (मेवात), गुरुग्राम, पलवल तथा महेन्द्रगढ़ हैं। राज्य का पंचकुला एक ऐसा जिला है, जो आरक्षित तथा संरक्षित वन क्षेत्र में प्रथम स्थान पर है।

(iii) अवर्गीकृत वन

❖ इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट, 2021 के अनुसार अवर्गीकृत श्रेणी के वन क्षेत्र 152 वर्ग किमी में फैला है, जो राज्य के कुल वन क्षेत्र का 9.48% है।

❖ इस प्रकार के वनों में सरकार का कोई प्रतिबन्ध नहीं होता। लकड़ी काटने और पशुचारण की स्वतंत्रता होती है।
❖ सरकार इसके लिए कुछ शुल्क प्राप्त करती है। ठेकेदार वनों से लकड़ी प्राप्त करते हैं।
❖ राज्य के सर्वाधिक अवर्गीकृत वन क्षेत्र वाले 5 जिले (घटते क्रम में) क्रमशः: कैथल, रोहतक, यमुनानगर, जींद तथा पलवल हैं।
❖ राज्य के न्यूनतम अवर्गीकृत वन क्षेत्र वाले 5 जिले (बढ़ते क्रम में) क्रमशः: भिवानी, हिसार, पंचकुला, नूंह (मेवात) तथा गुरुग्राम हैं।

वन विभाग के आधार पर वनों का वर्गीकरण

❖ हरियाणा वन विभाग के तहत प्रदेश के वनों को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया है—
(i) राजकीय वन—ये ऐसे वन क्षेत्र होते हैं, जिन पर सरकार का पूर्णतः नियन्त्रण होता है।
(ii) सामुदायिक वन—ये ऐसे वन क्षेत्र होते हैं, जो स्थानीय निकायों; जैसे— जिला परिषद, नगरपालिका एवं नगर पंचायत आदि के नियन्त्रण में होते हैं।
(iii) निजी वन—ये ऐसे वन क्षेत्र होते हैं, जिन पर व्यक्तिगत लोगों का अधिकार होता है अर्थात वे लोगों के नियन्त्रण में होते हैं।

नोट— इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट, 2021 में चरखी-दादरी जिले का विवरण नहीं दिया गया है।

राज्य में सर्वाधिक व न्यूनतम वन क्षेत्र वाले प्रमुख जिले

सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले 3 जिले (घटते क्रम में)न्यूनतम वन क्षेत्र वाले 3 जिले (बढ़ते क्रम में)
1. पंचकुला (392.70 वर्ग किमी)1. पलवल (13.56 वर्ग किमी)
2. यमुनानगर (192.99 वर्ग किमी)2. पानीपत (16.45 वर्ग किमी)
3. गुरुग्राम (113.71 वर्ग किमी)3. फरीदाबाद (18.49 वर्ग किमी)

❖ राज्य के कैथल जिले में वन क्षेत्र में सर्वाधिक वृद्धि (1.75 वर्ग किमी) दर्ज की गई।
❖ राज्य के गुरुग्राम जिले में वन क्षेत्र में सर्वाधिक कमी (2.47%) दर्ज की गई है।

राज्य में सर्वाधिक व न्यूनतम वन प्रतिशत वाले प्रमुख जिले

सर्वाधिक वन प्रतिशत वाले 3 जिले (घटते क्रम में)न्यूनतम वन प्रतिशत वाले 3 जिले (बढ़ते क्रम में)
1. पंचकुला (43.66%)1. फरीदाबाद (0.73%)
2. यमुनानगर (10.93%)2. जींद (0.83%)
3. गुरुग्राम (10.69%)3. पलवल (1.00%)

❖ हरियाणा राज्य में सर्वाधिक वृक्ष यूकेलिप्टस (सफेदा) और इजराइली बबूल के पाए जाते हैं।
❖ हरियाणा में ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक वृक्ष यूकेलिप्टस (सफेदा) और शीशम के पाए जाते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में सर्वाधिक वृक्ष नीम और यूकेलिप्टस (सफेदा) के पाए जाते हैं।
❖ हरियाणा राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्र वृद्धि वाले जिले कैथल और सिरसा हैं।
❖ हरियाणा राज्य में न्यूनतम वन क्षेत्र वृद्धि वाले जिले गुरुग्राम और भिवानी हैं।
❖ हरियाणा राज्य का कुल वन कार्बन 10232 हजार टन है।

वृक्षारोपण

❖ ग्रीनिंग ऑफ हरियाणा कार्यक्रम (1989–90) के अन्तर्गत राज्य में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कराया जा रहा है।

❖ राज्य के वनों में विभिन्न जड़ी-बूटियाँ भी पाई जाती हैं, जिनमें कुरण्ड, खट्टी, चौलाई, बबूना, गोकुल, इन्द्रायण, अश्वगंधा, गिलोय यशवाली साटी, सदाबहार मकोय आदि प्रमुख हैं।
❖ दूब, ढेला, सुरट, लापरी, दुबाच, धामण, साभक आदि घासें भी उगती हैं। झाड़ियों का प्रमुख क्षेत्र गुरुग्राम है।
❖ राज्य में सरकण्डा बहुलता से उगता है, जिससे रस्सी बनती है व मुढ़ों का कुटीर उद्योग भी चलता है।
❖ राज्य में नदियों, नहरों, सड़कों, रेल मार्गों के किनारे और ग्रामों (गांवों) के चारों ओर वृक्षों की पेटियाँ बनाई गई हैं।
❖ राज्य के वनों से विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियाँ प्राप्त की जाती हैं, जिनका उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है।
❖ हरियाणा में वर्ष 2014 से प्रत्येक वर्ष 15 जुलाई को राज्य में वन दिवस मनाया जा रहा है।

राज्य वन नीति, 2006

❖ राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार, राज्यों में उनके कुल क्षेत्रफल के 20% भाग पर वन होने चाहिए।
❖ वन सम्पदा के सतत विकास के लिए हरियाणा सरकार द्वारा वन नीति, 2006 बनाई गई, जिसका उद्देश्य वर्ष 2010 तक राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 10% भाग में तथा अन्ततः 20% भाग में वनाच्छादन के लक्ष्य को प्राप्त करना था।

राज्य की इस वन नीति के निम्न लक्ष्य हैं—

❖ पर्यावरण स्थायित्व एवं पारिस्थितिकी सन्तुलन कायम रखने हेतु वृक्षारोपण।
❖ राज्य के प्राकृतिक वनों में जैव-विविधता का संरक्षण।
❖ संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीवों हेतु प्राकृतिक आवासों का संरक्षण एवं विकास।
❖ वनों में जल संसाधनों का संरक्षण एवं विकास।
❖ वनों के अपक्षय को रोकना।
❖ लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सततता के आधार पर वनरोपण में वृद्धि करना।
❖ नदी एवं जल संग्रहण क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकना।
❖ राज्य के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में बालुका टीलों के विस्तार को रोकना।
❖ लवणता प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्स्थापन।
❖ बंजर भूमि में वृक्षारोपण एवं सामाजिक वानिकी कार्यक्रम द्वारा वृक्षाच्छादित क्षेत्रों में वृद्धि।
❖ कृषि वानिकी को प्रोत्साहित कर औद्योगिक लकड़ियों के उत्पादन में वृद्धि करना।
❖ वनोपजों की समुचित उपयोगिता एवं अन्य विकल्पों को प्रोत्साहित करना। इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु महिला एवं बच्चों सहित बहुत जन आंदोलनों को बढ़ावा देना।
❖ संयुक्त वन प्रबंधन एवं वन संबंधी क्रिया-कलापों में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु ग्राम स्तर पर संस्थाओं का गठन करना।
❖ स्वयं सहायता समूह का निर्माण करना, विशेष कर महिलाओं के लिए।
❖ औषधीय पौधों का संरक्षण एवं विकास करना।
❖ ‘इको-टूरिज्म’ का विकास करना।
❖ वनोपज की कीमतों को स्थिर रखने हेतु विपणन बाजार का विकास करना।

पर्यावरण न्यायालय

❖ हरियाणा राज्य के फरीदाबाद व हिसार जिलों में पर्यावरण संबंधी मुद्दों को निपटाने के लिए दो विशेष पर्यावरण न्यायालयों की स्थापना की गई थी।
❖ वर्तमान में पर्यावरण न्यायालय हरियाणा के दो जिलों (फरीदाबाद और कुरुक्षेत्र) में स्थित है।
❖ वर्ष 1998 में हरियाणा के करनाल जिले में पर्यावरण संबंधी मामलों के निपटारे हेतु एक स्पेशल कोर्ट की स्थापना की गई थी।
❖ हरियाणा में सोहना और पिंजौर में पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र स्थित है।

हरियाणा की प्रमुख वन संरक्षण योजनाएँ एवं कार्यक्रम

राज्य में केंद्र सरकार व बाह्य क्षेत्र द्वारा संचालित योजनाएँ

हर घर हरियाली योजना

❖ यह योजना राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2015 में शुरू की गई। इस योजना के अन्तर्गत स्थानीय प्रजातियों के विकास पर बल दिया जाता है।
❖ इन स्थानीय प्रजातियों के अन्तर्गत पीपल, नींबू, अमरूद, देसी आम, जामुन, हरड़, बहेड़ा, शहतूत, बेर, कनेर, जड़ी, रोहिड़ा, बड़, गूंदी आदि आते हैं।
❖ इस योजना का उद्देश्य अगले 5 वर्षों में वन सम्पदा को 10% तक करना है।
❖ इसके साथ ही राज्य में जैव-विविधता बोर्ड का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य के जैविक स्रोतों का संरक्षण करना है।

सामुदायिक वानिकी योजना

❖ हरियाणा सामुदायिक वानिकी परियोजना यूरोपीय संघ की सहायता से वर्ष 1998–99 में प्रारम्भ की गई थी तथा यह वर्ष 2006–07 में पूर्ण हो गई।
❖ इस योजना के अन्तर्गत 27,380 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण किया गया।
❖ इस परियोजना में 11 जिलों के 338 गाँवों को शामिल किया गया था, जिसमें महिलाओं की भागीदारी प्रमुख रही।

हरियाणा वन विकास निगम

❖ इस निगम की स्थापना 7 दिसम्बर, 1989 को हुई थी। इसका कार्यालय पंचकुला में स्थित है।

कण्डी योजना

❖ विश्व बैंक द्वारा समर्थित यह योजना अंबाला तथा यमुनानगर जिलों के उत्तरी भाग के अन्तर्गत शिवालिक क्षेत्र में पुनः वृक्षारोपण से संबंधित है।
❖ यह योजना वन, कृषि, पशुपालन तथा बागवानी विभागों की समेकित योजना है।

अरावली पर्वत श्रृंखला पुनर्वास योजना

❖ यूरोपीय आर्थिक समुदाय द्वारा समर्थित यह योजना अनावृत अरावली पहाड़ियों पर पुनः वृक्ष लगाने से संबंधित है।
❖ यह योजना वर्ष 1990–91 से क्रियान्वित की जा रही है।

राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाएँ

प्रकृति शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम

❖ इस कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय लोगों को विशेषकर युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूक करना है।

पौधा गिरी अभियान

❖ इसकी शुरुआत वर्ष 2018 में की गई।
❖ इसके तहत कक्षा 6 से 12 के बच्चों को वृक्षारोपण से जोड़ा गया है।

नेचर कैम्प

❖ हरियाणा वन विभाग ने पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी को अनुकूल रखने के लिए नेचर कैम्प स्थापित किए हैं।
❖ इसके माध्यम से पर्यावरण अनुकूलन के साथ-साथ राज्य में इको पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
❖ हरियाणा में धारापुरी, मोरनी, बनसन्तौर एवं चूहापुर में नेचर कैम्प स्थापित किए गए हैं।

हर्बल पार्क

❖ हरियाणा सरकार के द्वारा राज्य के प्रत्येक जिले में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर्बल पार्क की स्थापना की गई है।
❖ राज्य में कुल 59 हर्बल पार्क स्थापित हैं—

उत्तरी क्षेत्र

प्रमुख हर्बल पार्क/वाटिकाजिला
केन्ट हर्बल पार्कअंबाला
वन्य बोर्ड हर्बल पार्कअंबाला
शंकर हर्बल पार्कखेड़ा गांव (अंबाला)
थापली हर्बल पार्कपंचकुला
टिक्कर ताल हर्बल पार्कमोरनी हिल्स (पंचकुला)
आदिवासीयमुनानगर
कपूर वाटिकापंचकुला
हरड़ वाटिकाअंबाला
चौधरी देवीलाल हर्बल वाटिकायमुनानगर
जामुन वाटिकाकैथल
गुहाना वाटिकागुहाना गांव (कैथल)
अर्जुन वाटिकाकुरुक्षेत्र

पश्चिमी क्षेत्र

प्रमुख हर्बल पार्क/वाटिकाजिला
स्व. सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल हर्बल पार्क (तोशाम)भिवानी
स्व. सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल हर्बल पार्क (केरू)भिवानी
चन्दन वाटिकाजींद
मुलैठी वाटिकाफतेहाबाद

(उत्तरी क्षेत्र)

प्रमुख हर्बल पार्क/वाटिकाजिला
डॉ. कुंवर सैनी गुप्ता हर्बल पार्कटोहाना (फतेहाबाद)
बहेड़ा वाटिकासिरसा
चौधरी मित्र सेन आर्य हर्बल पार्कखांडा खेरी गांव (हिसार)
शतावर वाटिकाहिसार

(मध्य क्षेत्र)

प्रमुख हर्बल पार्क/वाटिकाजिला
इन्द्री हर्बल पार्ककरनाल
खानपुर कलां हर्बल पार्कखानपुर
हर्बल पार्क पिंडारवासझज्जर
अशोक वाटिकाकरनाल
अमलतास वाटिकासोनीपत
पजेजना वाटिकाझज्जर
बिल्वा वाटिकापानीपत
नीम वाटिकारोहतक

(दक्षिणी क्षेत्र)

प्रमुख हर्बल पार्क/वाटिकाजिला
महेन्द्रगढ़ हर्बल पार्कमहेन्द्रगढ़
चन्द्रो देवी वाटिकादोघी गांव (महेन्द्रगढ़)
फाजलीपुर हर्बल पार्कफाजलीपुर गांव (महेन्द्रगढ़)
खेड़ी हर्बल पार्कखेड़ा गांव (महेन्द्रगढ़)
मोहल्ला हर्बल पार्कमोहल्ला गांव (महेन्द्रगढ़)
कोका हर्बल पार्ककोका गांव (महेन्द्रगढ़)
इंदिरा गांधी मेमोरियल हर्बल पार्कदेवलावास (रेवाड़ी)
शहीद भगत सिंह हर्बल पार्क काकोडियाकाकोडिया (रेवाड़ी)
महात्मा गांधी मेमोरियल हर्बल पार्कखटनावास (रेवाड़ी)
गुरेश वाटिकागुरेश गांव (रेवाड़ी)
श्री छोटूराम हर्बल पार्क धुरकावासधुरकावास गांव (रेवाड़ी)
पाली हर्बल पार्कपाली गांव (रेवाड़ी)
सरदार वल्लभ भाई पटेल हर्बल पार्क गुर्जर घाटालगुर्जर घाटाल गांव (रेवाड़ी)
बाबल वन हर्बल पार्कराठधाना (रेवाड़ी)
मीरपुर हर्बल पार्कमीरपुर युनिवर्सिटी (रेवाड़ी)
भूरथल हर्बल पार्कभूरथल गांव (रेवाड़ी)
करिया हर्बल पार्कमहेन्द्रगढ़
आंवला हर्बल वाटिकागुरुग्राम
रत्नजोत वाटिकाफरीदाबाद
गुगल वाटिकामहेन्द्रगढ़
पवन वाटिकामहेन्द्रगढ़
धुनकुमारी वाटिकानूंह (मेवात)
खलीलपुरी वाटिकारेवाड़ी

Important Links

Haryana Forest Wealth (Mock Test)Click Here
Haryana GKClick Here
About Haryana (Wikipedia)Click Here

1. Haryana Forest Wealth Notes क्या है?

Haryana Forest Wealth Notes में हरियाणा के वनों, वनस्पति, वन क्षेत्र, वन प्रकार और उनके आर्थिक व पर्यावरणीय महत्व से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है। यह Haryana GK का एक महत्वपूर्ण टॉपिक है, खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए।

2. Haryana Forest Wealth Notes के अनुसार हरियाणा में कितने प्रतिशत वन क्षेत्र है?

Haryana Forest Wealth Notes के अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र बहुत कम है। कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 3–4% ही वास्तविक वन क्षेत्र है, जबकि कुल वन एवं वृक्ष आवरण लगभग 7% के आसपास है।

3. Haryana Forest Wealth Notes में वन के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?

Haryana Forest Wealth Notes के अनुसार राज्य में मुख्य रूप से तीन प्रकार के वन पाए जाते हैं—उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती (Tropical Dry Deciduous), कांटेदार वन (Thorn Forest) और उपोष्णकटिबंधीय वन। ये वन मुख्यतः शिवालिक और अरावली क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

4. Haryana Forest Wealth Notes में वन संसाधनों का क्या महत्व है?

Haryana Forest Wealth Notes के अनुसार वन संसाधन पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा ये लकड़ी, ईंधन और औषधीय पौधों जैसे संसाधन भी प्रदान करते हैं, जिससे आर्थिक लाभ भी होता है।

5. Haryana Forest Wealth Notes के नोट्स कहाँ से पढ़ें या डाउनलोड करें?

आप Haryana Forest Wealth Notes और Haryana GK से जुड़े विस्तृत नोट्स और PDF www.hrgk.in जैसी वेबसाइट से पढ़ और डाउनलोड कर सकते हैं, जहाँ परीक्षा के अनुसार structured और आसान भाषा में सामग्री उपलब्ध होती है।

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