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Haryana GK: Haryana Irrigation System Notes PDF Download हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था

By Ravi Yadav

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यदि आप हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) की तैयारी कर रहे हैं, तो “Haryana GK: Haryana Irrigation System Notes PDF Download हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था” एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था राज्य की कृषि का आधार मानी जाती है, जिसमें नहरें, ट्यूबवेल और आधुनिक सिंचाई तकनीकों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था से संबंधित सरल और विस्तृत नोट्स प्रदान करेंगे, जिससे आपकी परीक्षा की तैयारी और अधिक मजबूत हो सके। साथ ही, आप यहां से इन नोट्स का PDF भी डाउनलोड कर सकते हैं, जो त्वरित पुनरावृत्ति के लिए उपयोगी होगा।

❖ हरियाणा में कुल सिंचित क्षेत्र 5672 हेक्टेयर है।
❖ सिरसा जिले में सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र (698 हेक्टेयर) है, जबकि सबसे कम सिंचित क्षेत्र (25 हेक्टेयर) वाला जिला पंचकूला है।
❖ हरियाणा में कुल सिंचाई अधीन निवल क्षेत्र 3102 हेक्टेयर है।
❖ सिरसा जिले में सर्वाधिक सिंचाई अधीन निवल क्षेत्र (369 हेक्टेयर) है जबकि सबसे कम सिंचाई अधीन निवल क्षेत्र (16 हेक्टेयर) वाला जिला पंचकूला है।
❖ सर्वाधिक नलकूप द्वारा सिंचाई अधीन निवल क्षेत्र वाला जिला कैथल (185 हेक्टेयर) है जबकि सबसे कम नलकूप द्वारा सिंचाई अधीन निवल क्षेत्र वाला जिला पंचकूला (15 हेक्टेयर) है।
❖ हरियाणा राज्य का निवल सिंचित क्षेत्र की बोए गए निवल क्षेत्र से प्रतिशतता (87.47%) में प्रथम स्थान है।
❖ हरियाणा राज्य के गुरुग्राम, रोहतक, करनाल और भिवानी में पवन चक्कियों की सहायता से सिंचाई की जाती है।

सिंचाई के विभिन्न साधन

राज्य के विभिन्न भागों में सिंचाई के भिन्न-भिन्न साधनों का प्रयोग किया जाता है –

उत्तर-पूर्वी भाग

❖ हरियाणा के इस भाग में शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी का क्षेत्र आता है। यह क्षेत्र अंबाला जिले में आता है।
❖ यहाँ का मैदानी भाग काफी उपजाऊ है तथा वर्षा भी पर्याप्त मात्रा में होती है। अतः यहाँ सिंचाई के कृत्रिम साधनों की कम आवश्यकता पड़ती है।
❖ इस भाग में सिंचाई का प्रमुख साधन वर्षा जल है।

मध्यवर्ती भाग

❖ हरियाणा के मध्यवर्ती भाग के अन्तर्गत करनाल, कुरुक्षेत्र, रोहतक, जींद, पानीपत तथा सोनीपत जिले आते हैं।
❖ राज्य के इस भाग में थोड़ी-बहुत वर्षा हो जाने से चावल और मक्का की फसलें आसानी से उगाई जाती हैं।
❖ नलकूप, कुएँ या नहरों की सहायता से रबी की फसल की सिंचाई की जाती है। अतः इस क्षेत्र में सिंचाई के मुख्य साधन नलकूप, कुएँ, नहर एवं वर्षा हैं।

दक्षिण-पूर्वी भाग

❖ राज्य के इस भाग के अन्तर्गत फरीदाबाद और गुरुग्राम जिले आते हैं। राज्य के इस भाग में वर्षा बहुत कम होती है।

❖ इस कारण यहाँ गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा, जौ आदि फसलों की खेती के लिए नहरों और नलकूपों से सिंचाई की जाती है।

रेतीली भाग

❖ राज्य के इस भाग के तहत भिवानी, सिरसा, हिसार और महेंद्रगढ़ जिले आते हैं। राज्य के इस भाग में वर्षा नहीं के बराबर होती है।
❖ ज्वार, बाजरा, मक्का, चना, गेहूँ यहाँ की मुख्य फसलें हैं, जिनकी सिंचाई नलकूपों की सहायता से फव्वारों द्वारा की जाती है।

सम्पूर्ण राज्य में सिंचाई एवं पेय

❖ हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग राज्य में नहर एवं जल निकासी तंत्र के संचालन और रख-रखाव के साथ सिंचाई के लिए पानी, तालाबों को भरने और औद्योगिक एवं अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए पानी की आपूर्ति करने की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
❖ हरियाणा सरकार द्वारा 14125 किमी लंबाई के 1521 चैनल के व्यापक नहर तंत्र का विकास किया गया।

राज्य की प्रमुख नहरें

❖ हरियाणा राज्य में मुख्यतः दो नहर तंत्र हैं—पश्चिमी नहर तंत्र और भाखड़ा नांगल तंत्र।
❖ हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार भाखड़ा प्रणाली में कुल 521 नहरें हैं जिनकी कुल लंबाई 5867 किमी है, यमुना प्रणाली में कुल 472 नहरें हैं जो कि 4311 किमी लंबी हैं और उठान प्रणाली की कुल 528 नहरें हैं जिनकी लंबाई 3947 किमी है।

पश्चिमी यमुना नहर

❖ यह यमुना नदी के पश्चिमी किनारे से ताजेवाला नामक स्थान से निकाली गई है।
❖ इस नहर की कुल लंबाई 3226 किमी है। यह राज्य की सबसे बड़ी और पुरानी नहर है। 1750 ई. के आस-पास नहर में अत्यधिक गाद (सिल्ट) जमा हो जाने के कारण नहर का प्रवाह बंद हो गया था।
❖ 1351 ई. में तुगलक वंश के शासक फिरोजशाह तुगलक द्वारा इस नहर की खुदाई तथा पुनरुद्धार का कार्य करवाया गया था।
❖ मुगल बादशाह अकबर ने वर्ष 1568 में इस नहर का पुनर्निर्माण किया और शाहजहाँ ने वर्ष 1626 ई. में इस नहर का विस्तार किया।
❖ 1817 ई. में अंग्रेज अधिकारी जी.आर. ब्लेन (इंजीनियर) को पश्चिमी यमुना नहर के पुनरुद्धार का श्रेय जाता है।
❖ सिरसा ब्रांच नहर पश्चिमी यमुना नहर की सबसे बड़ी शाखा है। इस नहर का निर्माण 1889-95 के मध्य हुआ था।
❖ दून घाटी के दक्षिण में यमुना नदी के पश्चिमी किनारे से ताजेवाला नामक स्थान पर हथिनीकुंड बाँध से पश्चिमी यमुना नहर निकलती है।
❖ 3226 किमी लंबी इस नहर में मुख्य नहर की कुल लंबाई 325 किमी है।
❖ इसके द्वारा अंबाला, पानीपत, सोनीपत, करनाल, रोहतक जिलों में सिंचाई की जाती है।

भाखड़ा नहर

❖ सतलज नदी पर नांगल बाँध बनाकर यह नहर निकाली गई है।

❖ सिरसा, रोहतक व हिसार जिलों में भाखड़ा नहर द्वारा सिंचाई की जाती है।
❖ यह नहर फतेहाबाद जिले में टोहाना से हरियाणा में प्रवेश करती है।
❖ भाखड़ा-नांगल राजस्थान, पंजाब व हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।
❖ यह राज्य की दूसरी सबसे बड़ी नहर है।
❖ यह नहर पंजाब के लुधियाना, फिरोजपुर, जालंधर और होशियारपुर जिलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाती है, वहीं हरियाणा में अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जिलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाती है।

जवाहरलाल नहर व भिवानी नहर

❖ भाखड़ा नहर से निकली गई यह छोटी नहरें हैं।
❖ जवाहरलाल नहर से महेंद्रगढ़ जिले में तथा भिवानी नहर से भिवानी जिले में सिंचाई की जाती है।

गुड़गांव नहर

❖ यह नहर दिल्ली के निकट ओखला नामक स्थान से यमुना नदी पर बाँध बनाकर निकाली गई।
❖ इस नहर के द्वारा गुरुग्राम, पलवल, नूंह व फरीदाबाद जिलों में सिंचाई की जाती है।
❖ इस नहर की शुरुआत 1996 ई. में की गई तथा यह 1985 ई. में पूर्ण हुआ।

राज्य की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं

जुई नहर परियोजना

❖ जुई नहर परियोजना एक उद्यान सिंचाई परियोजना है, जो भिवानी जिले के ऊँचे क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
❖ यह लगभग 170 किमी लम्बी है तथा इसके द्वारा हिसार-रेवाड़ी रेलमार्ग के सहारे लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।
❖ इस नहर को बेसिलाल नहर के नाम से भी जाना जाता है।

लोहारू उद्यान सिंचाई परियोजना

❖ यह लगभग 225 किमी लम्बी है।
❖ लोहारू उद्यान सिंचाई परियोजना, जिसे इन्दिरा गांधी नहर भी कहते हैं। इसके द्वारा भिवानी जिले की सिंचाई की जाती है।

भिवानी उद्यान सिंचाई परियोजना

❖ इस परियोजना के अन्तर्गत लगभग 220 किमी लम्बी नहर द्वारा भिवानी जिले की लगभग 1 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की जाती है।
❖ भिवानी उद्यान सिंचाई परियोजना, जिसे चौधरी नारायण चक्रवर्ती नहर भी कहते हैं। इसके द्वारा भिवानी जिले की सिंचाई की जाती है।

सतलुज-यमुना लिंक विवाद

❖ सतलुज-यमुना लिंक की कुल लंबाई लगभग 211 किमी है। हरियाणा में इसकी लंबाई 90 किमी तथा पंजाब में 121 किमी है।

❖ सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर पंजाब एवं हरियाणा की संयुक्त नहर परियोजना है।
❖ इसे भाखड़ा नहर की शाखा नवलका से जोड़ने की योजना थी, जो अब विवादों में है।
❖ हरियाणा तथा पंजाब राज्य के बीच इसके निर्माण पर विवाद है। पंजाब ने सतलुज–यमुना लिंक परियोजना को रद्द करते हुए किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन वापस कर दी है।
❖ हरियाणा के क्षेत्र में लिंक नहर का कार्य पूरा हो चुका था। राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में इस परियोजना को पूरा करने की याचिका दायर कर रखी है।

राज्य में अन्य प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं

सिंचाई परियोजनासिंचित क्षेत्र/जिला
1. नांगल उद्यान सिंचाई परियोजनाअंबाला
2. जवाहरलाल नेहरू उद्यान सिंचाई परियोजनामहेंद्रगढ़
3. मेवात नहर सिंचाई परियोजनामेवात
4. दादूपुर नलवी नहर सिंचाई परियोजनायमुनानगर, अंबाला और कुरुक्षेत्र
5. नरवाना सिंचाई परियोजनाजींद
6. हथिनीकुंड बैराज परियोजनायमुनानगर
7. इंदिरा गांधी नहरसिरसा

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